Shiva Sanskrit Shloka। भगवान शिव के श्रेष्ठ संस्कृत श्लोक 

Shiva Sanskrit Shloka। भगवान शिव के श्रेष्ठ संस्कृत श्लोक

यहाँ भगवान शिव के प्रसिद्ध और शक्तिशाली संस्कृत श्लोक दिए गया है । यह  श्लोक भक्ति, शांति, संरक्षण और आत्मबल के लिए अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं।


भगवान शिव (Shiva Sanskrit Shloka) के श्रेष्ठ संस्कृत श्लोक :
  • सबसे प्रसिद्ध शिव श्लोक (ध्यान हेतु):

करचरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा
श्रवणनयनजं वा मानसं वा अपराधम्।
विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व
जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥

Hindi Meaning: हे करुणा के सागर महादेव! हाथ-पैर, वाणी, शरीर, इंद्रियों या मन से जाने-अनजाने हुए सभी अपराधों को कृपया क्षमा करें।

  •  शिव की करुणा और शांति का श्लोक :

नमः शिवाय शान्ताय कारणत्रय हेतवे।
निवेदयामि चात्मानं त्वां गतिं परमेश्वर॥

Hindi Meaning: हे शांत स्वरूप शिव! आप ही सृष्टि के कारण हैं। मैं स्वयं को आपको समर्पित करता हूँ, आप ही मेरी परम गति हैं।

  • शिव पंचाक्षरी मंत्र (अत्यंत शक्तिशाली) :

ॐ नमः शिवाय।

Hindi Meaning: 
मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ। (यह मंत्र मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करता है)

  •  शिव के निराकार स्वरूप का श्लोक :

न भूतो न भविष्यति न वर्तमानः प्रभुः।
स एव शंकरो देवः सदा शान्तो निरञ्जनः॥

Hindi Meaning: जो न भूत है, न भविष्य, न वर्तमान— वही प्रभु शंकर हैं, जो सदा शुद्ध, शांत और निरंजन हैं।

  • शिव संरक्षण और निर्भयता श्लोक :

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

Hindi Meaning: हम त्रिनेत्र धारी शिव की उपासना करते हैं, वे हमें बंधनों से मुक्त करें और अमरता प्रदान करें।


💥 शिव श्लोक पढ़ने के लाभ :

👉 मन को शांति मिलती है। 

👉 नकारात्मकता दूर होती है। 

👉 आत्मबल और साहस बढ़ता है। 

👉 ध्यान और साधना में सहायता। 

👉 भय और तनाव से मुक्ति। 

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