Class 9 Sanskrit Iravati Chapter 5 दानवीरः कर्णः | NCERT Translation, Question Answers & Solutions
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पाठ-परिचय: दानवीरः कर्णः
प्रस्तुत पाठ महाकवि भास द्वारा रचित सुप्रसिद्ध एकांकी नाटक कर्णभारम से संकलित है, यह प्रसंग महाभारत के युद्ध के समय का है। इस नाट्यांश में दानवीर कर्ण की अद्वितीय दानशीलता और त्याग की पराकाष्ठा को दर्शाया गया है। अर्जुन की सहायता करने के लिए देवराज इंद्र (शक्र) एक ब्राह्मण का वेष धारण करके कर्ण के पास आते हैं और उनसे बड़ी भिक्षा की मांग करते हैं। इसका नैतिक संदेश यही है कि सच्ची दानशीलता, त्याग और अपने वचनों के प्रति निष्ठा ही मनुष्य को अमर बनाती है चाहे उसके लिए कितना भी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
The presented text has been compiled from the famous one-act play Karnabharam, composed by the great poet Bhasa. This context is from the time of the Mahabharata war. This dramatic excerpt depicts the unparalleled generosity and the ultimate pinnacle of sacrifice of the benevolent Kama.To assist Arjuna, Devraj Indra (Shakra) approaches Karna in the guise of a Brahmin and demands great alms. The moral message of this is that true generosity, sacrifice and loyalty to one's wordsmakes a person immortal, no matter how high a price has to paid for it.
(ततः प्रविशति ब्राह्मणवेषधारी शक्रः।)
Hindi: तब ब्राह्मण का वेश धारण किए हुए शक्र (इन्द्र) प्रवेश करता है।
शक्रः — भो कर्ण! महत्तरां भिक्षां याचे।
Hindi: हे कर्ण! मैं आपसे एक बड़ी भिक्षा माँगता हूँ।
English: O Karna! I ask for a great alms.
कर्णः — भगवान्! कर्णोऽहं भवन्तं नमस्करोमि। आज्ञापय किमिच्छसि किं ददामि।
Hindi: हे भगवान्! मैं कर्ण हूँ और आपको प्रणाम करता हूँ। आज्ञा दीजिए, आप क्या चाहते हैं? मैं आपको क्या दूँ?
English: O revered one! I am Karna and I bow to you. Please tell me what you desire. What shall I give you?
शक्रः — महत्तरां भिक्षां याचे।
Hindi: मैं आपसे एक बड़ी भिक्षा माँगता हूँ।
English: I ask for a great alms.
कर्णः — महत्तरां भिक्षां भवते प्रदास्ये। गोसहस्रं ददामि।
Hindi: मैं आपको बड़ी भिक्षा दूँगा। मैं एक हजार गायें देता हूँ।
English: I shall give you a great alms. I give you a thousand cows.
शक्रः — मुहूर्तकं क्षीरं पिबामि। नेच्छामि कर्ण!
Hindi: मैं दूध थोड़ा ही पीता हूँ। मैं इसे नहीं चाहता, कर्ण!
English: I shall drink milk for a moment. I do not want this, Karna!
कर्णः — किं नेच्छति भवान्? वाजिनां सहस्रं ते ददामि।
Hindi: आप क्या नहीं चाहते? मैं आपको एक हजार घोड़े देता हूँ।
English: What do you not want? I give you a thousand horses.
शक्रः — मुहूर्तकमारोहामि। नेच्छामि कर्ण! नेच्छामि।
Hindi: मैं घोड़े की सवारी ज्यादा नहीं करता हूँ। मैं नहीं चाहता, कर्ण! नहीं चाहता।
English: I shall pause for a moment. I do not want it, Karna! I do not want it.
कर्णः — एतत् वारणानां वृन्दं ददामि।
Hindi: मैं हाथियों का यह विशाल समूह देता हूँ।
English: I give this group of elephants.
शक्रः — एतदपि नेच्छामि।
Hindi: मैं इसे भी नहीं चाहता।
English: I do not want this either.
कर्णः — अन्यदपि श्रूयताम्। अपर्याप्तं कनकं ददामि।
Hindi: और भी सुनिए। मैं असीमित सोना देता हूँ।
English: Hear something else too. I give unlimited gold.
शक्रः — गृहीत्वा गच्छामि। (गत्वा पुनरागत्य च) नेच्छामि कर्ण! नेच्छामि।
Hindi: मैं इसे लेकर चला जाता हूँ। (जाकर फिर लौटकर) मैं नहीं चाहता, कर्ण! नहीं चाहता।
English: I shall take it and go. (Going and returning again) I do not want it, Karna! I do not want it.
कर्णः — तेन हि जित्वा पृथिवीं ददामि।
Hindi: तब मैं पृथ्वी को जीतकर आपको देता हूँ।
English: Then I shall conquer the earth and give it to you.
शक्रः — पृथिव्या किं करिष्यामि?
Hindi: मैं पृथ्वी का क्या करूँगा?
English: What shall I do with the earth?
कर्णः — तेन हि मच्छिरो ददामि।
Hindi: यदि ऐसा है, तब मैं अपना सिर ही आपको देता हूँ।
English: Then I shall give my own head.
शक्रः — अविहा! अविहा!
Hindi: अरे नहीं! अरे नहीं!
English: Oh no! Oh no!
कर्णः — न भेतव्यम्, न भेतव्यम्। प्रसीदतु भवतु। अन्यदपि श्रूयताम्— भगवते यदि उचितं स्यात् कुण्डलाभ्यां सह कवचं ददामि।
Hindi: डरना नहीं चाहिए, डरना नहीं चाहिए। प्रसन्न हो जाइए। और भी सुनिए—यदि आपको उचित लगे तो मैं कुण्डलों के साथ अपना कवच भी दान में दे देता हूँ।
English: Do not be afraid, do not be afraid. Be pleased. Hear something else too—if it is suitable for you, I shall give my armour along with my earrings.
शक्रः — (सहर्षम्) ददातु, ददातु।
Hindi: (बहुत प्रसन्न होकर) दीजिए, दीजिए।
English: (Joyfully) Give it, give it.
कर्णः — (आत्मगतम्) एष एवास्य कामः! (प्रकाशम्) गृह्यताम्।
Hindi: (मन में) यही ये चाहते है! (प्रकट रूप से) इसे ग्रहण कीजिए।
English: (To himself) This indeed is his desire! (Aloud) Please accept it.
शल्यराजः — अङ्गराज! न दातव्यम्, न दातव्यम्!
Hindi: हे अंगराज! नहीं देना चाहिए, नहीं देना चाहिए!
English: O King of Anga! You should not give it, you should not give it!
कर्णः — शल्यराज! अलम् अलं वारयितुम्।
Hindi: देखिए, हे शल्यराज! बस कीजिए, मुझे रोकने का प्रयास मत कीजिए।
English: O Shalya, enough! Do not try to stop me.
Hindi Meaning : समय बीतने के साथ शिक्षा का क्षय हो जाता है। बहुत मजबूत जड़ों वाले पेड़ भी गिर जाते हैं। जल अपने स्थान पर पड़ा-पड़ा सूख जाता है। लेकिन यज्ञ में अर्पित और दान में दिया हुआ धन उसी प्रकार स्थिर रहता है। इसलिए इसे ग्रहण कीजिए।
English Meaning : With the passage of time, learning may decline. Even trees with very strong roots eventually fall. Water kept in its place dries up. But what is offered in sacrifice and what is given in charity remains everlasting. Therefore, accept it.
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वारणानाम् | गजानाम् |
हाथियों का |
Of elephants |
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वृन्दम् |
समूहः |
समूह |
Group / Multitude |
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अपर्याप्तम् | असीमितम् |
बहुत अधिक |
Unlimited |
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शक्रः |
इन्द्रः |
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Indra |
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गृहीत्वा | स्वीकृत्य | ग्रहण कर | Having taken |
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आगम्य | आगत्य | आकर | After coming |
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जित्वा | जयम् |
प्राप्य जीतकर | Having conquered |
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प्रसीदतु |
प्रसन्नो भवतु | प्रसन्न हों | Be pleased |
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भेतव्यम् |
भयं करणीयम् |
डरना चाहिए |
Should be afraid |
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आत्मगतम् |
मनोगतम् |
मन ही मन |
To oneself |
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अविहा हा | कष्टम् / मा एवम् | नहीं, नहीं;ऐसा मत करो | Oh no! / Do not do this |
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कामः | इच्छा |
कामना |
Desire |
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प्रकाशम् |
प्रकटम् |
प्रकट रूप से |
Publicly |
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अङ्गराजः |
हे कर्ण! (अङ्गदेशस्य नृपः) |
हे कर्ण! (अंग देश का राजा!) |
'O’ King of Anga! |
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अलम् अलम् |
वारयितुम् निवारणं मा कुरु |
रोकना व्यर्थ है |
Enough, do not stop |
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शुष्यति |
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सूख जाता है |
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निवृत्य |
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लौटकर |
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कालपर्ययात् |
समयपरिवर्तनेन /कालक्रमेण |
समय बीतने पर |
With the passage of time |
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सुबद्धमूला |
सुदृढमूला |
बहुत मजबूत जड़ वाले |
Very firmly rooted |
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हुतम् |
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Offered in sacrifice |
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| तरुः | वृक्ष | Tree |
व्याकरणम् — उत्तमपुरुषस्य प्रयोगः वक्तुः कृते (बोलने वाले के लिए) भवति। यदा कश्चित् जनः स्वस्य विषये किमपि वदति, तदा उत्तमपुरुषस्य प्रयोगः भवति। अस्मिन् ‘अस्मद्’ शब्दस्य प्रयोगः भवति।
Hindi: उत्तम पुरुष का प्रयोग बोलने वाले व्यक्ति के लिए किया जाता है। जब कोई व्यक्ति अपने विषय में कुछ कहता है, तब उत्तम पुरुष का प्रयोग होता है। इसमें ‘अस्मद्’ शब्द का प्रयोग होता है।
English: The first person is used for the speaker. When a person speaks about himself/herself, the first-person form is used. The pronoun ‘asmad’ is used here.
उत्तमपुरुषः शब्दस्य सर्वनामपदानि कर्तृरूपेण भवन्ति। उत्तमपुरुषस्य संक्षिप्तं विवरणं त्रिषु वचनेषु अधोलिखितम् अस्ति—
पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्उत्तमपुरुषः अहम् (मैं / I) आवाम् (हम दोनों / We two) वयम् (हम सब / We)
क्रिया — लट्-लकारे / वर्तमानकाले
एकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्आमि — (पठ् + आमि = पठामि) आवः — (पठ् + आवः = पठावः) आमः — (पठ् + आमः = पठामः)
वाक्यप्रयोगाः
एकवचने: अहं पठामि।
Hindi: मैं पढ़ता/पढ़ती हूँ।
English: I am reading.
द्विवचने: आवां पठावः।
Hindi: हम दोनों पढ़ते/पढ़ती हैं।
English: We two are reading.
बहुवचने: वयं पठामः।
Hindi: हम सब पढ़ते/पढ़ती हैं।
English: We are reading.
Hindi: उत्तम पुरुष के सर्वनाम अहम्, आवाम्, वयम् तीनों लिंगों में समान रहते हैं।
English: The first-person pronouns aham, āvām and vayam remain the same in all three genders.
यथा — प्रश्नः: के निपतन्ति?
क. ब्राह्मणवेषधारी कः प्रविशति?
ख. शक्रः किं भिक्षां याचते?
ग. कर्णः प्रथमं किं दातुम् इच्छति?
घ. कालपर्ययात् का क्षयं गच्छति?
ङ. कः कर्णं वारयति?
२. उचितं पर्यायं मेलयत् —
यथा — वृन्दम् — समूहः
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१. वृक्षाः |
क. अश्वाः |
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२. शक्रः |
ख. पादपाः |
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३. स्वर्गम् |
ग. कनकम् |
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४. वाजिनः |
घ. कर्णः |
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५. अङ्गराजः |
ङ. इन्द्रः |
उत्तरम् :
१. वृक्षाः | ख. पादपाः |
२. शक्रः | ङ. इन्द्रः |
३. स्वर्णम् | ग. कनकम् |
४. वाजिनः | क. अश्वाः |
५. अङ्गराजः | घ. कर्णः |
३. प्रथमपुरुषस्य क्रियापदानि उत्तमपुरुषे परिवर्तयत् —
यथा — पिबति → पिबामि
क. करोति → __________________
ख. ददाति → __________________
ग. इच्छति → __________________
घ. गच्छति → __________________
ङ. हसति → __________________
उत्तरम् :
क. करोति → करोमि
ख. ददाति → ददामि
ग. इच्छति → इच्छामि
घ. गच्छति → गच्छामि
ङ. हसति → हसामि
१. अधोलिखितं श्लोकं सस्वरं गायत अर्थात् भावार्थैः सहपाठिभिः सह चर्चा कुरुत। (नीचे दिए गए श्लोक को स्वर सहित गाइए और उसके भावार्थ पर सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।)
२. द्वौ छात्रौ मिलित्वा कर्णशक्रयोः संवादस्य ध्वनिमुद्रणं कृत्वा कक्षायां श्रावयताम्। (दो विद्यार्थी मिलकर कर्ण और शक्र के संवाद की ऑडियो रिकॉर्डिंग करें और कक्षा में सुनाएँ।)
३. ‘अस्मद्’ शब्दस्य सर्वाणि रूपाणि प्रदत्तं प्रारूपं दृष्ट्वा स्फोरकपत्रे लिखत। (दिए गए प्रारूप को देखकर ‘अस्मद्’ शब्द के सभी रूपों को चार्ट पेपर पर लिखिए।)
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दानवीरः कर्णः — Dānavīraḥ Karṇaḥ — The Generous Karna
मुख्य पात्र / Main Characters: कर्णः (Karna), शक्रः/इन्द्रः (Shakra/Indra), शल्यराजः (Shalya).
मुख्य विषय / Main Theme: दानशीलता, त्यागः, वचनपालनम् — generosity, sacrifice and keeping one's promise.
मुख्य व्याकरण / Grammar Focus: उत्तमपुरुषः and the forms of अस्मद्.
मुख्य श्लोक / Key Verse: शिक्षा क्षयं गच्छति कालपर्ययात्...
नैतिक संदेश / Moral: True generosity and commitment to one's word make a person immortal.
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