Sanskrit Shlok on Karma । कर्म पर श्रेष्ठ संस्कृत श्लोक

Sanskrit Shlok on Karma । कर्म पर श्रेष्ठ संस्कृत श्लोक

यहाँ कर्म (Karma) पर आधारित श्रेष्ठ संस्कृत श्लोक (Sanskrit Sloka) उनके सरल हिन्दी अर्थ सहित दिए जा रहे हैं। ये श्लोक जीवन, कर्तव्य और सही मार्ग की गहरी समझ देते हैं।
 
कर्म पर श्रेष्ठ संस्कृत श्लोक (Sanskrit Sloka on Karma):
 
  • 🌿 सबसे प्रसिद्ध कर्म श्लोक (भगवद्गीता से) :


कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

Hindi Meaning: तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल की इच्छा मत करो, और अकर्म (कर्तव्य से विमुख होना) में आसक्त मत हो।

 
  • 🌱 कर्म से ही भाग्य बनता है :


उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥

Hindi Meaning:  केवल इच्छाओं से नहीं, परिश्रम और कर्म से ही कार्य सिद्ध होते हैं। सोए हुए सिंह के मुख में शिकार स्वयं नहीं आता।

 
  • 🌼 कर्म से कोई नहीं बच सकता :

न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्।

Hindi Meaning:  कोई भी व्यक्ति एक क्षण भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता।

 
  • 🌟 कर्म का फल अवश्य मिलता है :

अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्।
नाभुक्तं क्षीयते कर्म कल्पकोटिशतैरपि॥

Hindi Meaning: किया गया शुभ या अशुभ कर्म अवश्य भोगना पड़ता है। कर्म करोड़ों कल्पों में भी नष्ट नहीं होता।

 
  • 🌺 निष्काम कर्म का संदेश :

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

Hindi Meaning:  आसक्ति त्यागकर, सफलता और असफलता में समान भाव रखते हुए कर्म करना ही योग है।

 
  • 🔱 कर्म ही धर्म है :

स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।

Hindi Meaning:  अपने धर्म और कर्तव्य में मर जाना भी श्रेष्ठ है, दूसरों के धर्म का अनुसरण भय उत्पन्न करता है।

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