Sanskrit Shloka Before Eating Food । भोजन से पहले पढ़ने का संस्कृत श्लोक

Sanskrit Shloka Before Eating Food । भोजन से पहले पढ़ने का संस्कृत श्लोक

यहाँ भोजन करने से पहले पढ़े जाने वाले (Sanskrit Shloka Before Eating Food) प्रमुख संस्कृत श्लोक दिए गए हैं, जिन्हें परंपरागत रूप से अन्न प्रार्थना / भोजन मंत्र कहा जाता है। ये श्लोक भोजन को पवित्र भाव से ग्रहण करने और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पढ़े जाते हैं।
 
भोजन से पहले पढ़ने का संस्कृत श्लोक :
 
  •  सबसे प्रसिद्ध भोजन मंत्र (भगवद्गीता से) :


ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्।
ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना॥

हिंदी अर्थ : 
यह भोजन ब्रह्म को अर्पित है, भोजन स्वयं ब्रह्म है, अग्नि ब्रह्म है और अर्पण करने वाला भी ब्रह्म है। जो व्यक्ति इस भाव से भोजन करता है, वह ब्रह्म को ही प्राप्त करता है।

  • अन्न को देवता मानकर किया गया मंत्र :


अन्नपूर्णे सदापूर्णे शंकरप्राणवल्लभे।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥

हिंदी अर्थ : 
हे माता अन्नपूर्णा! आप सदा पूर्ण हैं, शिव की प्राणप्रिय हैं। हमें ज्ञान और वैराग्य की सिद्धि के लिए अन्न प्रदान करें।

  • कृतज्ञता भाव का भोजन मंत्र :

अन्नदेवो भव।
प्राणदेवो भव।

हिंदी अर्थ :  
अन्न देवता के समान है और प्राणों का आधार है।

  • सरल और छोटा श्लोक (दैनिक प्रयोग हेतु) :


ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥

हिंदी अर्थ :  
ईश्वर हमारी रक्षा करें, हमें साथ पोषण दें, हम मिलकर शक्ति से कार्य करें और आपस में द्वेष न हो।


🙏 भोजन से पहले मंत्र पढ़ने का महत्व :


➥ मन शांत और पवित्र रहता है ।

➥ भोजन सात्त्विक बनता है।

➥ पाचन में सहायता मिलती है।

➥ अन्न के प्रति सम्मान और कृतज्ञता बढ़ती है।

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