Class 7 Sanskrit Chapter 1 Hindi Translation वन्दे भारतमातरम् | NCERT Hindi Translation for Class 7 Sanskrit Deepakam दीपकम्


Class 7 Sanskrit Chapter 1 Hindi Translation वन्दे भारतमातरम् | NCERT Hindi Translation for Class 7 Sanskrit Deepakam दीपकम्


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Sanskrit Class 7 Chapter 1 Hindi Translation वन्दे भारतमातरम् Summary

 
वन्दे भारतमातरम् 

पाठ का परिचय (Introduction of the Lesson):

इस पाठ में भारत की पवित्रता और महानता का सुंदर वर्णन किया गया है। इसके शिखर पर हिमालय मुकुट की भाँति शोभायमान है, जबकि चारों ओर फैले समुद्र इसके चरणों का स्पर्श करते हैं। यहाँ की नदियाँ माँ के समान सभी जीवों का पालन-पोषण करती हैं।

भारत अनेक पवित्र तीर्थस्थलों की भूमि है। इसके राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंग—केसरिया, सफेद और हरा—क्रमशः साहस, शांति और समृद्धि के प्रतीक हैं। यह पाठ हमें भारतमाता के प्रति समर्पित रहने तथा उसके सम्मान और गौरव को बढ़ाने की प्रेरणा देता है। साथ ही, यह देशभक्ति की भावना को जागृत करने का एक सुंदर प्रयास प्रस्तुत करता है।


1. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

पुत्रः – अम्ब! वयं विभिन्नेषु कार्यक्रमेषु, आकाशवाण्यां, शालायां च ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतं बहुत्र शृणुमः । किन्तु अस्य अर्थं न जानीमः । मातः! अस्य कः अर्थः ?

पुत्री – ‘इदं गीतं कः लिखितवान्’ इत्यपि मम जिज्ञासा अस्ति ।


माता – वत्सौ! महान् देशभक्तः बंकिमचन्द्रः चट्टोपाध्याय: १८८२ तमे वर्षे ‘आनन्दमठः’ इति नामकम् उपन्यासं लिखितवान्। “वन्दे मातरम्” इति गीतं तस्मिन् एव उपन्यासे वर्तते । ‘वन्दे मातरम्’ इत्यस्य अर्थः अस्ति यत् ‘अहं मातुः वन्दनं करोमि’।
पुत्री – मातः! इदं गीतं कस्यां भाषायाम् अस्ति ?

शब्दार्थाः (Word Meanings) :

बहुत्र – अनेक स्थानों पर (In many places),
शृणुम: – हम सुनते हैं (We listen),
जिज्ञासा – जानने की इच्छा (Curiosity),
उपन्यासं – उपन्यास को (Novel) ।


सरलार्थ (Hindi Translation):-

पुत्र – माते! हम लोगों ने विभिन्न कार्यक्रमों में आकाशवाणी पर घर में और अनेक स्थानों पर ‘वन्दे मातरम्’ इस गीत को सुना है। लेकिन इसके अर्थ को नहीं जानते हैं। माता ! इसका क्या अर्थ है ?
पुत्री – ‘इस गीत को किसने लिखा?’ यह भी मेरी जिज्ञासा है।


माता – बच्चो! महान देशभक्त बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 ई० में ‘आनन्दमठ’ नाम के उपन्यास को लिखा । ‘वन्दे मातरम्’ यह गीत उसी उपन्यास में है । ‘वन्दे मातरम्’ इसका अर्थ है कि ‘मैं माता की वन्दना करता हूँ।
पुत्री – माता! यह गीत किस भाषा में है?


2. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

माता – पुत्रि ! एतत् गीतं संस्कृतं बाङ्ग्ला च इति भाषाद्वये वर्तते ।
पुत्र: – मातः! अस्मिन् गीते वर्ण्यः विषयः कः अस्ति ?


माता – पुत्र ! अस्मिन् गीते भारतमातुः स्वरूपस्य रम्यं वर्णनम् अस्ति।
पुत्रः – अम्ब! एतस्य गीतस्य किं वैशिष्ट्यम् ?
माता – बालौ! स्वतन्त्रतायाः आन्दोलने सर्वे देशभक्ताः एतत् गीतं मन्त्रम् इव गायन्ति स्म । सम्प्रति अपि इदं गीतं श्रुत्वा गीत्वा च वयं सर्वे भारतीयाः प्रेरिताः भवामः।
पुत्री – मातः! ‘वन्दे मातरम्’ इति गीतस्य अर्थः इतिहास : च कियान् महान् !
पुत्रः – अम्ब! आवाम् अस्माकं राष्ट्रध्वजस्य विषये अपि किञ्चित् ज्ञातुम् इच्छावः ।
माता – साधु, अधुना वयं भारतमातुः त्रिवर्णध्वजस्य च विषये जानीमः ।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :


रम्यं – सुंदर (Pleasant),
आन्दोलने – आंदोलन में (In the movement),
श्रुत्वा -सुनकर (After listening),
ज्ञातुम्—जानने के लिए (For knowing),
अधुना -अभी (Now)।
 

सरलार्थ (Hindi Translation)-

माता – पुत्रि ! यह गीत संस्कृत और बांग्ला इन दो भाषाओं में है।
पुत्र – माता ! इस गीत का वर्ण्य विषय क्या है?
माता – पुत्र ! इस गीत में भारतमाता के स्वरूप का सुंदर वर्णन है।
पुत्र – माता! इस गीत का क्या वैशिष्ट्य है?
माता – बच्चो! स्वतंत्रता के आंदोलन में सभी देशभक्त इस गीत को मंत्र के समान गाते थे। अभी भी इस गीत को सुनकर और गाकर हम सभी भारतीय प्रेरित होते हैं।
पुत्री – माता! ‘वन्दे मातरम्’ इस गीत का अर्थ और इतिहास कितना महान है !
पुत्र – माता! हम दोनों अपने राष्ट्रध्वज के विषय में भी कुछ जानना चाहते हैं ।
माता – साधु, अब हम भारतमाता के तिरंगे ध्वज के विषय में जानते हैं।

3. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:


एषा अस्माकं वत्सला भारतमाता । अहो अस्माकं भारतमातुः माहात्म्यम् ! साक्षात् पर्वतराज हिमालयः मुकुटरूपेण अस्याः, मस्तके शोभते। अस्याः चरणौ प्रक्षालयति स्वयं रत्नाकरः समुद्रः । भारतभूमौ महेन्द्रः, मलयः, सह्यः, रैवतकः, विन्ध्यः, अरावलिः इत्यादयः श्रेष्ठाः पर्वताः विराजन्ते । अत्रैव गङ्गा, यमुना, सरस्वती, सिन्धुः ब्रह्मपुत्रः, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी इत्यादयः पवित्राः नद्यः प्रवहन्ति । नद्यः अपि अस्माकं मातरः इव ।

शब्दार्था: (Word Meanings) :

वत्सला – स्नेहालु (Loving),
माहात्म्यम् – महिमा (Greatness),
पर्वतराज : – पर्वतों का राजा (The king of mountains),
मुकुटरूपेण – मुकुट रूप से (As a crown),
रत्नाकर : – समुद्र ( Sea)।

सरलार्थ (Hindi Translation)-

यह हमारी स्नेहालु भारतमाता हैं। अहा, हमारी भारतमाता की महिमा ! साक्षात् पर्वतराज हिमालय मुकट रूप से इनके मस्तक पर सुशोभित होता है। स्वयं रत्नाकर समुद्र इनके चरणों को धोता है । भारतभूमि पर मलय, सहय, रैवतक, विन्ध्य, अरावलि इत्यादि श्रेष्ठ पर्वत विराजित हैं । यहाँ गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, ब्रह्मपुत्र, गण्डकी, महानदी, नर्मदा, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आदि पवित्र नदियाँ बहती हैं। नदियाँ हमारी माताएँ हैं ।


4. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

 अयोध्या, मथुरा, हरिद्वारम् काशी, काञ्ची, अवन्तिका, वैशाली, द्वारिका, पुरी, गया, प्रयागः, पाटलीपुत्रं विजयनगरम् इन्द्रप्रस्थ, सोमनाथः अमृतसरः इत्यादीनि मङ्गलानि तीर्थक्षेत्राणि नगराणि च भारतभूमौ एव सुशोभन्ते । एतेषां तीर्थक्षेत्राणां धूलिं ललाटे स्थापयितुं विविधेभ्यः प्रदेशेभ्यः असंख्याः जनाः आगच्छन्ति । भारतमातुः हस्ते विलसति त्रिवर्णयुतः राष्ट्रध्वजः । अहो अस्य शोभा ! अस्मिन्

राष्ट्रध्वजे केशरः, श्वेतः, हरितः च वर्णाः विराजन्ते । ध्वजस्य मध्ये सुन्दरं नीलवर्णं चक्रमपि शोभते । ध्वजे विराजमानाः वर्णाः चक्रं च विशिष्टं सन्देशं प्रयच्छन्ति ।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :

तीर्थक्षेत्राणि – तीर्थस्थल (Holy places),
धूलिम् – धूल को (Dust),
ललाटे – माथे पर (On the forehead),
विराजमान :- विराजमान ( Shining)।

सरलार्थ (Hindi Translation)-

अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, काञ्ची, अवन्तिका, वैशाली, द्वारिका, पुरी, गया, प्रयाग, पाटलीपुत्र, विजयनगर, इन्द्रप्रस्थ, सोमनाथ, अमृतसर इत्यादि मंगल तीर्थक्षेत्र एवं नगर भारतभूमि पर ही सुशोभित हैं। इन तीर्थक्षेत्रों की धूलि को ललाट पर लगाने हेतु अलग-अलग प्रदेशों से असंख्य लोग आते हैं । भारतमाता के हाथ में तीन रंगों वाला राष्ट्रध्वज सुशोभित हो रहा है। अहा इसकी शोभा! इस राष्ट्रध्वज में केसरिया, सफ़ेद एवं हरा रंग विराजमान है। ध्वज के बीच में सुंदर नीले रंग का चक्र भी शोभता है। ध्वज में विराजमान रंग और चक्र विशिष्ट संदेश देते हैं।

5. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

त्रिवर्णध्वजस्य ऊर्ध्वभागे विराजते केशरवर्णः । एषः वर्णः त्यागपरम्परायाः शौर्यपरम्परायाः च सूचकः अस्ति । ये भारतमातुः आजीवनं सेवां कृतवन्तः, देशस्य स्वतन्त्रतां प्राप्तुं सहर्षं स्वप्राणान् अर्पितवन्तः च तेषां वीराणां बलिदानं सूचयति एषः वर्णः । ‘जयंतु सैनिक : ‘ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजस्थितः अयं केशरवर्णः ।


शब्दार्थाः (Word Meanings) :

सूचक :- सूचित करने वाला (Indicator),
प्राप्तुम् – पाने के लिए (To get),
वक्तुम् – बोलने के लिए (To speak),
प्रेरयति – प्रेरणा देता है (Inspire),
केशरवर्णः – केसरिया रंग (Saffron colour)।
 

सरलार्थ (Hindi Translation):-

तिरंगे ध्वज के उपरि भाग में केसरिया रंग विराजित है । यह वर्ण त्याग – परंपरा एवं शौर्य – परंपरा का सूचक है । जिन्होंने भारतमाता की सेवा हमेशा की, देश की स्वतंत्रता को प्राप्त करने हेतु सहर्ष अपने प्राणों को अर्पित किए, उन वीरों के बलिदान को यह वर्ण सूचित करता है। ‘सैनिक की जय हो’ यह बोलने की प्रेरणा हमें ध्वजस्थित केसरिया रंग देता है।

6. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

कृषकबान्धवाः अस्माकं भारतभूमिं सर्वदा स्व-स्वेदबिन्दुभिः सिञ्चन्ति । एतेषां परिश्रमेण एव भारतभूमिः हरितवर्णमयी, समृद्धा सस्यश्यामला च सञ्जाता । भारतमातुः समृद्धेः एषा आभा हरितवर्णरूपेण अस्माकं राष्ट्रध्वजे विराजते ।
‘जयतु कृषिक : ‘ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजस्थितः एषः हरितवर्णः ।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :

कृषकबान्धवाः – किसान भाई (Our dear farmers),
स्वेदबिन्दुभि: – पसीने की बूँद से ( By sweat- drops),
सिञ्चन्ति-सींचते हैं (Sprinkle),
सस्यश्यामला – फसलों से हरा भरा (Green with crops),
आभा – चमक (Lusture)।

सरलार्थ (Hindi Translation):-

किसान भाई हमारी भारतभूमि को हमेशा अपने पसीने की बूँदों से सींचते हैं। इनके परिश्रम के द्वारा ही भारतभूमि हरियालीयुक्त समृद्ध और फसलों से हरी-भरी हुई है । भारतमाता की समृद्धि की यह चमक हरे रंगे के रूप में हमारे राष्ट्रध्वज में विराजित है । ‘किसान की जय हो’ यह बोलने की प्रेरणा हमें ध्वजस्थित हरा रंग देता है।

7. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

मध्ये स्थितः श्वेतवर्णः शान्तेः सत्यस्य च द्योतकः अस्ति । अणुशास्त्रे, सङ्गणकशास्त्रे, चिकित्साशास्त्रे, अन्तरिक्षशास्त्रे, आयुधशास्त्रे इत्यादिषु विज्ञानस्य क्षेत्रेषु भारतीयैः वैज्ञानिकैः महत् यशः प्राप्तम् अस्ति। वैज्ञानिकानां तत् धवलं यशः धवलवर्णरूपेण राष्ट्रध्वजस्य मध्ये विलसति। भारतीयं विज्ञानं शान्तिं प्रगतिं सुरक्षां च परिपोषयति । ‘जयतु वैज्ञानिकः’ इति वक्तुम् अस्मान् प्रेरयति ध्वजमध्यस्थः अयं धवलवर्णः।
 

शब्दार्था: (Word Meanings) :

अणुशास्त्रे – परमाणु विज्ञान में (In atomic science),
आयुधशास्त्रे – शस्त्र विज्ञान में (In science of weapon),
धवलम् – श्वेत (White) ।

सरलार्थ (Hindi Translation):-

बीच में स्थित सफ़ेद रंग शांति और सत्य का द्योतक है। परमाणु विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, चिकित्साशास्त्र, अन्तरिक्षशास्त्र, शस्त्र विज्ञान आदि विज्ञान के क्षेत्रों में भारतीय वैज्ञानिकों के द्वारा बहुत यश प्राप्त हुआ है। वैज्ञानिकों का शुभ्र यश सफ़ेद रंग के रूप में राष्ट्रध्वज के बीच में चमकता है। भारतीय विज्ञान शांति, प्रगति और सुरक्षा को परिपोषित करता है । ‘वैज्ञानिक की जय हो’ यह बोलने की प्रेरणा हमें ध्वज के मध्य में स्थित सफ़ेद रंग देता है।

8. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

 ध्वजे विराजमानस्य घननीलवर्णस्य चक्रस्य नाम धर्मचक्रम् इति । अस्मिन् चक्रे चतुर्विंशतिः अराः सन्ति । एतत् चक्रं ‘चलनीयं कर्तव्यपथे वै, न विरम, सततं चल’ इति भावं बोधयति । सूर्यः विरामं विना नित्यं सञ्चरति । नदी कष्टानि सहमाना अपि ध्येयं प्रति नित्यं प्रवहति। इदं चक्रं ‘जीवने श्रान्ते:, आलस्यस्य प्रमादस्य च स्थानं न भवतु’ इति सन्देशं प्रयच्छति ।

शब्दार्था: (Word Meanings) :

घननीलवर्णस्य – गहरे नीले रंग का (Of navy-blue colour),
अरा:- तीलियाँ (Spokes of a wheel),
कर्तव्यपथे—कर्तव्यमार्ग पर (On the path of duty),
सहमाना – सहती हुई (Bearing),
श्रान्ते: – थकान का (Of tiredness),
प्रमादस्य – असावधानता का (Of carelessness)।

सरलार्थ (Hindi Translation):-

ध्वज में विराजमान गहरे नीलवर्ण के चक्र का नाम धर्मचक्र है। इस चक्र में 24 तीलियाँ हैं । यह चक्र ‘ बिना रूके कर्तव्यपथ पर सतत चलना चाहिए’ इस भाव को जगाता है। सूर्य विराम के बिना नित्य संचरण करता है। नदी कष्टों को सहते हुए भी ध्येय के प्रति नित्य प्रवाहित होती है। यह चक्र ‘ जीवन में थकान का, आलस्य का और प्रमाद का स्थान न हो’ यह संदेश देता है।

9. पाठ- शब्दार्थ एवं सरलार्थ:

वयं सर्वेऽपि धन्याः यत् अस्यां पवित्रभूम्यां जन्म प्राप्तवन्तः । वयं परमपवित्रायाः भारतमातुः नित्यं वन्दनं कुर्मः, अस्याः मौरववर्धनार्थं च प्रयत्नं कुर्मः । आगच्छन्तु मिलित्वा सर्वे गायाम:-

वयं बालका भारतभक्ताः
वयं बालिका भारतभक्ताः।
वयं हि सर्वे भारतभक्ताः
पृथ्वीं स्वर्गं जेतुं शक्ताः।।

शब्दार्थाः (Word Meanings) :

मिलित्वा-मिलकर (Jointly),
जेतुम् – जीतने के लिए (To win)।


सरलार्थ (Hindi Translation):-

 हम सभी धन्य हैं जो इस पवित्र भूमि में जन्म प्राप्त किए। हम सब परम पवित्र भारतमाता की नित्य वंदना करते हैं, इसके गौरव को बढ़ाने हेतु प्रत्यत्न करते हैं। आओ मिलकर सब गाते हैं-

हम सभी बालक भारतभक्त
हम सभी बालिका भारतभक्त ।
हम सभी ही भारतभक्त
पृथ्वी, स्वर्ग को जीतने में समर्थ ।।

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