Class 7 Sanskrit Chapter 12 Hindi Translation वीराङ्गना पन्नाधाया | NCERT Hindi Translation for Class 7 Sanskrit Deepakam दीपकम्
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Class 7 Sanskrit Chapter 12 Summary Notes वीराङ्गना पन्नाधाया
यह पाठ त्याग, निष्ठा और देशभक्ति की अद्भुत मिसाल पन्ना धाय की वीरता से हमें परिचित कराता है। वे राणा उदयसिंह की धाय माता थीं। जब राजमहल में उदयसिंह के प्राण संकट में थे, तब पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन को उनके स्थान पर सुला दिया। परिणामस्वरूप बनवीर ने चंदन को ही राणा समझकर मार डाला, और इस प्रकार पन्नाधाय ने अपने पुत्र का बलिदान देकर उदयसिंह के प्राणों की रक्षा की।
इस प्रकार पन्नाधाय ने अपने देश और राज्य के उत्तराधिकार की रक्षा के लिए अपने मातृत्व से भी ऊपर उठकर महान बलिदान दिया। उनका यह त्याग मातृत्व, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है।
“यह भूमि मेरी माता है और मैं इसका पुत्र/पुत्री हूँ”—इस भावना को पन्नाधाय ने अपने जीवन से साकार किया। उन्होंने अपने स्वार्थ को त्यागकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि माना।
यह कथा हमें सिखाती है कि सच्चा वीर वही है, जो अपने कर्तव्य और देश के लिए व्यक्तिगत भावनाओं से ऊपर उठ सके। पन्नाधाय का यह अद्वितीय बलिदान इतिहास में सदा अमर रहेगा और हमें साहस, त्याग तथा निष्ठा का मार्ग दिखाता रहेगा।
एषा भारतभूमिः वीराणां त्यागधनानां भूमिः अस्ति । सर्वे भारतीयाः ‘एषा भूमिः अस्माकं माता’ इति वदन्ति । अथर्ववेदे ‘माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ इति उक्तम् । मातृभूमेः रक्षणार्थं भारतीयाः सर्वस्वम् अर्पितवन्तः । एतादृशानां भारतीयानां गणनायां महिलानां प्रभूतं योगदानम् अस्ति। त्यागे वीरतायां च महिलाः शत्रुनिबर्हणाः आसन्। एतादृशीषु वीराङ्गनासु राजस्थानस्य पन्नाधाया काचिद् विशिष्टा वीराङ्गना आसीत्। एषा साहसस्य त्यागस्य निष्ठायाः च अद्वितीया मूर्तिः आसीत् । अस्मिन् पाठे तस्याः त्यागस्य पराक्रमस्य च वर्णनं कृतम् । एषा इतिहासस्य स्वर्णिमाक्षरैः लिखिता घटना अस्ति।
शब्दार्थाः (Word Meanings) : त्यागधनानां – बलिदानियों का (Of people who sacrifice everything), सर्वस्वम् – अपना सब कुछ (One’ everything), प्रभूतं – अधिक (Abundant), शत्रुनिबर्हणाः – शत्रुओं का नाश करने वाला (Destroyers of enemies), वीराङ्गनासु-वीर नारियों में (Among brave women), साहसस्य – साहस का (of courage), अद्वितीया – जिसके समान कोई दूसरा न हो (Matchless), स्वर्णिमाक्षरैः – सोने के अक्षरों से (With golden letters)।
सरलार्थ-
यह भारतभूमि वीरों की (और) त्याग, बलिदान करने वालों की भूमि है। सभी भारतीय ‘यह भूमि हमारी माता’ है ऐसा बोलते हैं। अथर्ववेद में “माता मेरी भूमि है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूँ” ऐसा कहा गया है। मातृभूमि की रक्षा के लिए भारतीय सब कुछ अर्पित कर देते हैं। ऐसे भारतीयों की गिनती में महिलाओं का बहुत ज़्यादा योगदान है। त्याग (बलिदान) और वीरता में महिलाएँ शत्रुओं का विनाश करने वाली थीं। ऐसी वीर नारियों में राजस्थान की पन्नाधाय एक विशेष वीर नारी थी। वह साहस, बलिदान की और भक्ति की अद्वितीय मूर्ति थी। इस पाठ में उनके त्याग और बलिदान का वर्णन किया गया है। यह इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखी गई घटना है।
षोडशे शतके मेवाडनगरे महाराणा – सङ्ग्रामसिंहः इति सुविख्यातः महाराजः आसीत् । तस्य द्वौ पुत्रौ विक्रमादित्यः उदयसिंहः च आस्ताम्। महाराणासङ्ग्रामसिंहस्य भ्राता पृथ्वीराजः । बनवीर : पृथ्वीराजस्य अष्टादशसु पुत्रेषु अन्यतमः ।
सः बनवीरः महाराणासङ्ग्रामसिंहस्य प्रथमं पुत्रं विक्रमादित्यं छलेन मारयित्वा मेवाडस्य शासनम् अकरोत् । ततः परमपि सः दुष्टबुद्धिः अचिन्तयत् यत्– “अहम् एकः एव उत्तराधिकारी भवेयम् । न कोऽपि मम प्रतिस्पर्धी स्यात्” इति।
अतः कदाचित् रात्रौ सः उदयसिंहं मारयितुं कुतन्त्रम् अरचयत्। तद् ज्ञात्वा पन्नाधाया उदयसिंहस्य शयनस्थाने स्वपुत्रं चन्दनं शायितवती । सा तस्य दुष्परिणामं जानाति स्म । बनवीर : उदयसिंहस्य शयनागारम् आगच्छत् । तत्र सुप्तः चन्दनः एव उदयसिंहः इति मत्वा बनवीरः चन्दनम् अमारयत् ।
शब्दार्था: (Word Meanings) : षोडशे शतके – सोलहवीं शताब्दी में (In the sixteenth century), आस्ताम् – दो थे (Two were present), भ्राता-भाई (Brother), अन्यतमः – बहुतों में एक (One of many), छलेन – कपट से (By deception), मारयित्वा-मारकर (After killing), दुष्टबुद्धिः – दुष्ट बुद्धि वाला (Evil minded), प्रतिस्पर्धी – प्रतिद्वंद्वी (Competitor), कदाचित् – कभी (Sometime), मारयितुं- मारने के लिए (To kill), कुतन्त्रम् – षड्यन्त्र (Evil plot), शयनस्थाने – सोने की जगह पर (Sleeping place), शायितवती – सुलाया (Put to sleep), दुष्परिणाम – अनिष्ट को (Bad outcome), शयनागारम् – सोने के कक्ष को (Bedroom)।
सरलार्थ-
सोलहवीं शताब्दी में मेवाड़नगर में महाराणा संग्रामसिंह नामक एक प्रसिद्ध महाराजा थे। उनके दो पुत्र विक्रमादित्य और उदयसिंह थे। महाराणा संग्राम सिंह के भाई पृथ्वीराज थे। बनवीर पृथ्वीराज के अठारह पुत्रों में से एक था।
बनवीर ने महाराणा संग्राम सिंह के पहले पुत्र विक्रमादित्य को छल से मारकर मेवाड़ पर राज किया। उसके बाद उस दुष्ट बुद्धि ने सोचा कि – ‘मैं अकेला ही उत्तराधिकारी बन जाऊँ । कोई भी मेरा प्रतिद्वन्दी नहीं होना चाहिए ।
इसके बाद किसी रात में उसने उदयसिंह को मारने के लिए षडयंत्र रचा। यह जानकर पन्नाधाय ने उदयसिंह के सोने के स्थान पर अपने पुत्र चन्दन को सुलाया। वह ( पन्नाधाय ) उसके बुरे परिणाम को जानती थी। बनवीर उदयसिंह के सोने के कमरे में आया। वहाँ सोए हुए चन्दन को ही उदयसिंह मानकर बनवीर ने चन्दन को मार दिया ।
पन्नाधायायाः निर्णयः अकल्पनीयः आसीत् । ‘व्यक्तिहितं न, राष्ट्रहितम् एव श्रेष्ठम् इति सा जानाति स्म । तस्याः पुत्रस्तु दिवङ्गतः ‘ परं सा मेवाडराज्यं बनवीरस्य कुतन्त्रात् अरक्षत्।
कालान्तरे सः एव उदयसिंह: युद्धे बनवीरं हत्वा मेवाडराज्यस्य राजा अभवत् । तस्य पुत्रः एव पराक्रमी योद्धा महाराणाप्रतापः। सः प्रतापः शौर्येण भारतीयानां हृदये चिरं स्थानं प्राप्नोत् । कथ्यते एव – “ यदि पन्नाधाया स्वपुत्रस्य बलिदानं न अकरिष्यत् तर्हि उदयसिंह : न अभविष्यत्। यदि उदयसिंहः न अभविष्यत् तर्हि महाराणाप्रतापः अपि न अभविष्यत्”।
पन्नाधायायाः त्यागः शौर्यं च जगति आचन्द्रार्कं तिष्ठति । भारतीये इतिहासे वीराङ्गनानां गणनासु पन्नाधाया महत्तमं स्थानं प्राप्नोत् । पन्नाधायायाः बलिदानं सर्वान् शौर्य, राष्ट्रभक्तिं, कर्तव्यनिष्ठां, बलिदानं, विवेकं च शिक्षयति । उच्यते एव-
“यदि पन्नाधाया नाभविष्यत् तर्हि कुतो राणाप्रतापः ”
शब्दार्थाः (Word Meanings) : अकल्पनीयः – चिंतन से परे (Beyond imagination), व्यक्तिहितं – स्वार्थ (Self interest), राष्ट्रहितं – राष्ट्र का हित (National’s interest), श्रेष्ठम् – सर्वोपरि (Highest), दिवङ्गतः – मर गया (Died), कुतन्त्रात्–षड्यंत्र से (From conspiracy), कालान्तरे – कुछ समय के बाद (Later on), हत्वा – मारकर (Having killed), पराक्रमी – वीर (Valorous), योद्धा-सैनिक (Warrior), शौर्येण – शूरता से (With bravery), चिरं – बहुत काल तक (For long time), जगति – संसार में (In the world), आचन्द्रार्कं-जब तक सूर्य और चंद्र हैं (As long as the sun and the moon are there), गणनासु – गिनतियों में (Amongst the consideration of), महत्तमं – बहुतों में श्रेष्ठ (Best among the greats), शिक्षयति – सिखाता है (Teaches) ।
सरलार्थ-
पन्नाधाय का निर्णय कल्पना से परे था। स्वयं के हित से कहीं श्रेष्ठ देश का हित है, ऐसा वह जानती थी। उसका पुत्र तो मर गया। परन्तु उसने मेवाड़ राज्य की बनवीर के षड्यन्त्रों से रक्षा की। कुछ समय के बाद ही उदयसिंह युद्ध में बनवीर को मारकर मेवाड़ राज्य का राजा बना। उसका पुत्र ही पराक्रमी योद्धा महाराणा प्रताप हुआ। महाराणा प्रताप ने अपनी वीरता के कारण भारतीयों के हृदय में स्थान प्राप्त किया। कहा ही जाता है- यदि पन्नाधाय ने अपने पुत्र का बलिदान नहीं किया होता तो उदयसिंह न हुआ होता। यदि उदयसिंह नहीं हुआ होता तो महाराणा प्रताप भी नहीं हुआ होता ।
जब तक संसार में सूर्य एवं चन्द्रमा रहेंगे तब तक पन्नाधाय का त्याग, और वीरता भी रहेंगे। भारतीय इतिहास में वीर नारियों की गिनती में पन्नाधाय ने सबसे बड़ा स्थान प्राप्त किया । पन्नाधाय का बलिदान सबको वीरता, देशभक्ति, कर्त्तव्य के प्रति भक्ति, त्याग और अच्छे बुरे का ज्ञान करना सिखाता है। कहा जाता है-
“यदि पन्नाधाय नहीं होती तो राणा प्रताप कहाँ से होते । ”

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