Class 7 Sanskrit Chapter 11 Hindi Translation द्वीपेषु रम्यः द्वीपोऽण्डमानः | NCERT Hindi Translation for Class 7 Sanskrit Deepakam दीपकम्
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Class 7 Sanskrit Chapter 11 Summary Notes द्वीपेषु रम्यः द्वीपोऽण्डमानः
यह पाठ अण्डमान और निकोबार द्वीप समूह की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक विविधता का सुंदर वर्णन प्रस्तुत करता है। यह भारत के केन्द्रशासित प्रदेशों में से एक प्रमुख द्वीप समूह है, जो बंगाल की खाड़ी में स्थित है और अपने अद्भुत समुद्री दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है।
यहाँ स्थित ‘सेल्युलर जेल’ आज भी ‘कालापानी’ के इतिहास की गवाही देती है, जहाँ बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को कारावास की कठोर सज़ा दी गई थी। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, रामायण काल में इस स्थान को ‘हंडुकमान’ कहा जाता था।
यह द्वीप समूह भाषाई और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं और विभिन्न जनजातियाँ निवास करती हैं। यहाँ का मुख्य व्यवसाय मत्स्य पालन है, जो लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
पर्यटन की दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत आकर्षक है। यहाँ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में मरीन पार्क और राधा नगर बीच विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। साथ ही, ‘जन्माष्टमी’ यहाँ का प्रमुख त्योहार है, जिसे बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
इस प्रकार, यह पाठ न केवल अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह के प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व को उजागर करता है, बल्कि हमें इसकी सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध विरासत से भी परिचित कराता है।
अध्यापिका – छात्राः! एतत् चित्रं पश्यन्तु । एतत् आकर्षकं खलु ?
छात्र: – आम् आचार्ये! बहु आकर्षकम् अस्ति।
अध्यापिका – एतत् स्थानं कुत्र अस्ति, भवन्तः जानन्ति किम् ?
छात्रा – नैव आचार्ये!
अध्यापिका – सावधानं पश्यन्तु । एतत् स्थानम् अस्माकं देशस्य कश्चन रमणीयः द्वीपः अस्ति । एतस्य विषये किञ्चित् अद्य जानीमः ।
सर्वे उत्साहिताः बालाः – महोदयें! वयम् एतस्य विषये किञ्चित् अधिकं ज्ञातुम् इच्छामः।
अध्यापिका – अस्तु । भोः सूर्यांश! भवान् किमपि वक्तुम् इच्छति? इति प्रतिभाति।
सूर्यांश: – सत्यं महोदये! ह्यः भवती एतस्य पाठस्य विषये सङ्केतं दत्तवती । तदा अहं गृहं गत्वा जालपुटे एतस्य अन्वेषणम् अकरवम्।
अध्यापिका – समीचीनं सूर्याश! भवान् किम् अन्विष्टवान् तत्र?
सूर्यांश: – महोदये! रामायणकाले अस्य द्वीपस्य नाम ‘हंडुकमान्’ आसीत् । एषः शब्दः प्रायः ‘हनूमान्’ इति शब्दस्य परिवर्तितं रूपम्। प्रथमशताब्द्याम् अस्य नाम ‘ अगादेमन्’ इति आसीत् । ततः परं ‘अङ्गादेमन् ‘ जातम् इति सर्वकारस्य आधिकारिक-जालपुटे अहं दृष्टवान्।
दीपेश: – अहो! अस्य नाम्नः इतिहास : अद्भुतः अस्ति । किन्नु खलु भारतस्य इतिहासे अस्य द्वीपस्य काचित् विशिष्टा भूमिका अस्ति?
अध्यापिका – आम्, महती भूमिका अस्ति अस्य द्वीपस्य ।
दीपा – कीदृशी भूमिका महोदये! कृपया सूचयतु ।
शब्दार्थाः (Word Meanings) : आकर्षकं – मनोहर (Attractive), सावधानं पश्यन्तु – ध्यान से देखो (Look carefully), अस्माकं – हमारा (Our), रमणीयः – सुंदर (Beautiful), द्वीप:- टापू (Island), ह्य: – कल (बीता हुआ) (Yesterday), सङ्केतम् – इशारा (Hint),दत्तवती – दी गई (Gave), गत्वा – जाकर (Went), जालपुटे – वेबसाइट पर (On the Website), अन्वेषणम् – खोज (Search), अकरवम् – किया (Did), अन्विष्टवान् – खोजा (Searched),
सरलार्थ-
अध्यापिका – बच्चो! इस चित्र को देखो। क्या यह मनोहर है ?
छात्र – हाँ, आचार्या! बहुत मनोहर है।
अध्यापिका – यह स्थान कहाँ है, आप सब जानते हैं क्या?
अध्यापिका – ध्यान से देखो। यह स्थान हमारे देश का कोई सुन्दर द्वीप है। इसके विषय में आज कुछ जानते हैं।
(भारत के मानचित्र में अण्डमान द्वीप समूह को दिखाती हुई) यह भारत के आठों केन्द्रशासित प्रदेशों में अलग अण्डमान द्वीपसमूह है। इसकी राजधानी ‘ श्री विजयपुरम् ‘ है । अंग्रेजी शासन के द्वारा पहले इसका नाम ‘पोर्ट ब्लेयर’ दिया गया था।
सभी बच्चे -उत्साहित होते हुए – महोदया! हम इस विषय में कुछ ज़्यादा जानना चाहते हैं ?
अध्यापिका – अच्छा! सूर्यांश ! आप कुछ कहना चाहते हैं? ऐसा लग रहा है।
सूर्यांश – सच में महोदया! कल आपने इस पाठ के विषय में संकेत दिया था। तब मैंने घर जाकर वेबसाइट पर इसका खोज किया।
अध्यापिका – अच्छा सूर्यांश! आपने वहाँ क्या खोजा?
सूर्यांश – अध्यापिका जी! रामायण के समय में इस द्वीप (टापू) का नाम ‘हंडुकमान्’ था। यह शब्द ‘हनूमान्’ शब्द का परिवर्तित रूप है। पहली शताब्दी में इसका नाम ‘ अंगादेमन’ हो गया, इसे मैंने सरकार के आधिकारिक वेबसाईट पर देखा।
दीपेश: – ओह! इसके नाम का इतिहास अद्भुत है। क्या भारत के इतिहास में इस द्वीप की कोई विशेष भूमिका है?
अध्यापिका – हाँ, इस द्वीप की बहुत बड़ी भूमिका है।
दीपा – कैसी भूमिका है महोदया ! कृपया बताएँ ।
अध्यापिका – अस्मिन् द्वीपे ‘सेल्युलर्’ इति कारागारम् अस्ति । अस्य कारागारस्य अपरं नाम ‘कालापानी’ इत्यपि अस्ति।
सुधीर: – (साश्चर्यम्) आचार्ये! अस्य कः अभिप्रायः?
सुरेखा – ‘कालापानी’ इति शब्दं श्रुत्वा एव भीतिः भवति ।
अध्यापिका – सत्यमेव। भारतस्य स्वातन्त्र्यार्थं युद्धरतानां क्रान्तिकारिणां दमनार्थं ब्रिटिशजनैः निर्मितं त्रितलात्मकम् एतत् कारागारम्। अत्रैव महान् देशभक्तः स्वातन्त्र्यवीरः सावरकर : मातृभूमेः रक्षणाय दश वर्षाणि यावत् कल्पनातीतं घोरं कष्टं सोढवान् ।
मुकुन्दः – अहो! धन्याः ते स्वातन्त्र्यवीराः । तेषां बलिदानेन एव वयं सुखेन जीवामः ।
सूर्याश: – आचार्ये! एतत् स्थानं ‘यूनेस्को’ – संस्थायाः वैश्विकसम्पदः सूच्याम् अपि संरक्षितम्।
ऋचा – महोदये! किम् अस्मिन् द्वीपे जनाः अपि निवसन्ति?
अध्यापिका – आम्, तत्र काश्चन अण्डमानी, ओङ्गी, जारवा, सेण्टिनली इत्यादयः विशिष्टाः जनजातयः निवसन्ति । अण्डमानी- ओङ्गी-जारवा-जनजातीनाम् आजीविकायै सर्वकारः नारिकेलस्य उद्यानानां निर्माणम् अकरोत्। सेण्टिनली-जनजातीयाः समाजात् दूरे तिष्ठन्ति । तेषां जनसंख्या अपि स्वल्पा एव ।
सुरुचि: – महोदये! अत्र भ्रमणाय विशिष्टानि स्थानानि कानि ?
अध्यापिका – भवत्सु कोऽपि अस्मिन् विषये कथयितुम् इच्छति ?
शब्दार्था: (Word Meanings) : स्वातन्त्र्यार्थं – स्वतंत्रता के लिए (For freedom), युद्धरतानां – लड़ाई में लगे हुए लोगों का (Of the people engrossed in battle), दमनार्थं – दबाने के लिए (For oppressing), निर्मितं – बनाया गया (?), त्रितलात्मकम् – तीन तल का (Three-storied), कारागारम् – जेल (Prison), मातृभूमेः – मातृभूमि की (Of motherland), रक्षणाय – रक्षा के लिए (For protection), कल्पनातीतं-चिंतन से परे (Beyond imagination), घोरं – भयानक (Terrific), सोढवान् -सहन किया (Bore), स्वातन्त्र्यवीराः – स्वतंत्रता के वीर (Freedom fights),
वैश्विकसम्पदः – विश्वधरोहर का (Of world heritage), सूच्याम् – सूची में ( In the List), संरक्षितम्-रखा गया है (Reserved), आजीविकायै – आजीविका के लिए (For livelihood), सर्वकारः – सरकार (Government), नारिकेलम् – नारियल (Coconut)।
सरलार्थ-
अध्यापिका – इस द्वीप में ‘सेल्युलर’ जेल है। इस जेल का दूसरा नाम ‘कालापानी’ भी है।
सुधीर – (आश्चर्य से) आचार्या, इसका क्या मतलब है?
राजर्षिः – आम् महोदये! अहं वक्तुम् इच्छामि। अहम् एकदा पित्रा सह भ्रमणाय तत्र अगच्छम् । वयं तत्र सर्वत्र प्रकृतेः हारित्यं नीलसमुद्रं च दृष्टवन्तः । वयं महात्मगान्धि- मरीन – राष्ट्रियम् उद्यानम्, नॉर्थ-बे-द्वीपम्, समुद्रिका – नौसेना समुद्रीय-सङ्ग्रहालयं, कालापत्थर-तटम्, विजयनगर-तटं च दृष्टवन्तः । तत्र भारतस्य समुद्रतटेषु राधानगर-तटस्य अत्यन्तं विशिष्टं स्थानम् अस्ति । तत्रत्यः श्वेतरेणुः, नीलं निर्मलं जलं पारदर्शि समुद्रतलं च अविस्मरणीयम् अस्ति।
अध्यापिका – उत्तमम्, राजर्षे! किं भवान् स्वराजद्वीपं दृष्टवान् ?
राजर्षि – न स्मरामि महोदये.!
अध्यापिका – स्वराजद्वीपे एलीफेण्टा-तटे, नॉर्थ-बे- अन्तरीपे च सिन्धुतलविहारं स्कूबाडाइविङ्ग्, स्नॉर्कलिङ्ग् इत्यादयः विविधाः गतिविधयः चलन्ति। समुद्रस्य अन्तर्भाग : विविधवर्णैः मत्स्यैः कच्छपै: अन्यैः जलचरै: प्रवालशृङ्खलाभिः च अलङ्कृतः इव दृश्यते ।
छात्रा: – महोदये! अण्डमान-जनाः आजीविकार्थं किं कुर्वन्ति ?
अध्यापिका – तत्र मुक्तामालाः, शुक्तिशिल्पानि, नारिकेल – शिल्पानि, उपस्कराः च इत्यादीनाम् उत्पादनेन वाणिज्येन च तेषाम् आजीविका चलति। केचन कृषिकार्येण मत्स्यव्यापारेण च जीविकां निर्वहन्ति ।
छात्रा: – आचार्ये! अस्य वर्णनं श्रुत्वा चित्राणि च दृष्ट्वा अस्माकं मनसि तत्र भ्रमणाय उत्सुकता जागरिता ।
अध्यापिका – अस्तु, वयम् अवश्यमेव तत्र शैक्षिक भ्रमणार्थं गमिष्यामः ।
अधुना वयं मिलित्वा गायाम: –
शब्दार्था: (Word Meanings) : हारित्यं – हरियाली को (Greenery), श्वेतरेणु: – श्वेत बालू (White sand),पारदर्शि – आरपार दिखने वाला (Transparent), कच्छपै: – कछुआ (Tortoise),मुक्तामाला: – मोतियों की माला (Pearl chain), शिल्पानि – कारीगरी (Sculpture), उपस्कराः – मसाले (Seasoning ) ।
सरलार्थ-
रविः – जी महोदय ! मैं कुछ कहना चाहता हूँ। एक बार मैं पिता जी के साथ घूमने के लिए वहाँ गया था। हमने वहाँ सब जगह हरियाली और नीला समुद्र देखा । हमने महात्मागांधी – मरीन, राष्ट्रीय उद्यान, उत्तरी खाड़ी द्वीप, समुद्री नौ सेना, समुद्रीय संग्रहालय, कालापत्थर बीच और विजयनगर बीच देखा। वहाँ भारत के समुद्र के किनारों पर राध नगर बीच का बहुत ही विशेष स्थान है। वहाँ पर स्थित सफ़ेद बालू, नीला शुद्ध पानी, आर-पार दिखने वाला समुद्र का तला न भूलने योग्य है।
अध्यापिका – बहुत अच्छा ! राजर्षि, क्या आपने स्वराज द्वीप देखा ?
रवि – याद नहीं है महोदया ।
अध्यापिका – स्वराजद्वीप में एलीफेण्टा बीच पर, उत्तरी खाड़ी द्वीप पर और समुद्र के तल पर विहार, स्कूबा डाइविंग, स्नार्कलिङ्ग इत्यादि अनेक प्रकार की गतिविधियाँ चलती हैं। समुद्र के अन्दर अनेक प्रकार के रंगों की मछलियों से कछुओं से और दूसरे जलजीवों के प्रवाल श्रृंखलाओं के द्वारा सजा हुआ-सा दिखाई देता है।
सभी छात्र – महोदया, अण्डमान के लोग अपने जीवन निर्वाह के लिए क्या करते हैं?
अध्यापिका – वहाँ मोतियों की माला, सीपी की कारीगरी, नारियल की कारीगरी और मसाले इत्यादि के उत्पादन के द्वारा और व्यापार के द्वारा उनका जीवन-निर्वाह होता है। कुछ खेती के काम से, मछलियों के व्यापार से अपने जीवन का निर्वाह (गुजारा) करते हैं।
सभी छात्र – आचार्या, इसका वर्णन सुनकर और चित्रों को देखकर हमारे मन में घूमने के लिए उत्सुकता जाग्रत हो गई है।
आओ हम सब मिलकर गाते हैं-
शहीदों की तपस्या से पवित्र गणेश आदि (देवताओं) की स्तुति करने वालों की यह धरती निश्चित ही अपने राष्ट्र धर्म को सिखाती हुई पृथ्वी पर तीर्थस्वरूप देखने योग्य है।

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