Sanskrit Class 7 Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः | NCERT Hindi Translation for Class 7 Sanskrit Deepakam दीपकम्
Here are mention Sanskrit Class 7 Notes and NCERT Class 7 Sanskrit Chapter 3 Hindi Translation Summary Explanation Notes मित्राय नमः to simplify complex chapters. Sanskrit Class 7 Chapter 3 Hindi Translation मित्राय नमः Summary
Class 7 Sanskrit Chapter 3 Summary Notes मित्राय नमः
इस पाठ का सार यह है कि इसमें सूर्य की शक्ति, उपयोगिता और उससे जुड़ी पूजन परंपराओं का सुंदर वर्णन किया गया है। सूर्य को जीवन का आधार माना गया है, क्योंकि वही प्रकाश, ऊर्जा और स्वास्थ्य का प्रमुख स्रोत है।
पाठ में ‘सूर्य नमस्कार’ के शारीरिक और मानसिक लाभों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। यह एक उत्कृष्ट योग-आसन क्रम है, जिसके अभ्यास से पूरे शरीर को स्वास्थ्य, शक्ति और ऊर्जा प्राप्त होती है। इससे शरीर सशक्त और सक्रिय बनता है, मन शांत रहता है तथा आत्मा की शुद्धि होती है। इसमें योग और भक्ति का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।
इसके साथ ही, पाठ में व्यायाम और योग के महत्व को भी स्पष्ट किया गया है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति स्वस्थ और निरोग रहता है। ‘सूर्य नमस्कार’ ऐसा प्रभावी अभ्यास है, जो शरीर को सक्रिय बनाकर संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करता है।
अतः यह पाठ हमें सूर्य के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और सूर्य नमस्कार को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने की प्रेरणा देता है।
एका छात्रा – अहो ! योगिते त्वं प्रातः किं करोषि ?
योगिता – अहं प्रतिदिनं प्रातः पित्रा सह उद्यानं गच्छामि ।
एका छात्रा – उद्याने किं करोषि भो : ?
योगिता – अहं तु भ्रमणं करोमि। किन्तु बहवः जनाः तत्र व्यायामं योगासनानि च कुर्वन्ति ।
एका छात्रा – अहो योगासनानि! वयम् अपि ज्ञातुम् इच्छामः।
योगिता – तर्हि वयं सर्वे योगशिक्षकस्य समीपं गच्छामः ।
(सर्वे उत्साहेन योगशिक्षिकायाः समीपं गच्छन्ति)
शब्दार्थाः (Word Meanings) : प्रतिदिनम् – रोजाना (Everyday), पित्रा सह-पिता के साथ (With father), भ्रमणम् – घूमना, सैर (Walking), योगासनानि – (योग + असनानि) योग के आसन (Yoga postures)।
हिंदी अनुवाद (Hindi Translation): -
एक छात्रा – ओह! योगिता, तुम सुबह क्या करती हो?
योगिता – मैं रोज सुबह पिता के साथ बगीचे में जाती हूँ।
एक छात्रा – आप बगीचे में क्या करती हो?
योगिता – मैं तो घूमती हूँ। परन्तु बहुत से लोग वहाँ व्यायाम और योगासन करते हैं।
एक छात्रा – ओह योगासन! हम सब भी जानना चाहते हैं ।
योगिता – तो हम सब योग सिखाने वाले (शिक्षक) के पास जाते हैं।
(सब उत्साह से योग – शिक्षिका के पास जाते हैं)
(क)
छात्राः – नमो नमः आचार्ये!
आचार्या – शुभं भवतु । उपविशन्तु सर्वे ।
छात्राः – आचार्ये! किम् अद्य भवान् अस्मान् योगासनं शिक्षयति ?
आचार्या – निश्चयेन, वदन्तु किम् आसनं शिक्षितुम् इच्छन्ति ?
योगिता – आचार्ये! अद्य सूर्यनमस्कारं शिक्षयतु |
आचार्या – समीचीनम्। सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति । प्रत्येकस्मात् सूर्यनमस्कारात् पूर्वम् एकः मन्त्रः भवति। तेषु प्रथमः मन्त्रः अस्ति – ॐ मित्राय नमः’ इति ।
छात्राः – आम् महोदये वयं स्मरामः… ।
आचार्या – अत्युत्तमम् ! मिलित्वा वदन्तु।
छात्राः – ॐ मित्राय नमः। ॐ रवये नमः । ॐ सूर्याय नमः । ॐ भानवे नमः । ॐ खगाय नमः। ॐ पूष्णे नमः । ॐ हिरण्यगर्भाय नमः । ॐ मरीचये नमः । ॐ आदित्याय नमः । ॐ सवित्रे नमः । ॐ अर्काय नमः । ॐ भास्कराय नमः । (सर्वान्ते) ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः ।
शब्दार्थाः (Word Meanings) : उपविशन्तु – बैठो (Sit), अद्य – आज (Today), मिलित्वा – मिलकर (Jointly)।
हिंदी अनुवाद (Hindi Translation): -
सब छात्र – आचार्या! नमस्कार।
आचार्या – कल्याण हो, सब बैठो।
सब छात्र – आचार्या! क्या आप आज हमें योगासन सिखा सकती हैं?
आचार्या – ज़रूर, बताओ कौन – सा आसन सीखना चाहते हो?
योगिता – आचार्या! आज सूर्यनमस्कार सिखाइए ।
आचार्या – ठीक है। सूर्य नमस्कार में बारह आसन होते हैं। हर एक सूर्यनमस्कार से पहले एक मन्त्र होता है। उनमें से पहला मन्त्र है- ‘ॐ मित्राय नमः ।
सब छात्र – हाँ, आचार्या! हम याद करते हैं…।
आचार्या – बहुत अच्छा! मिलकर बोलो।
सब छात्र – मित्र को नमस्कार है। रवि को नमस्कार है। सूर्य को नमस्कार है । भानु को नमस्कार है । खग को नमस्कार है। पोषण करने वाले क़ो नमस्कार है। हिरण्यगर्भ ( ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति करने वाले) को नमस्कार है। मरीचि को नमस्कार है। अदिति के पुत्र के लिए नमस्कार है । सावित्रि को नमस्कार है । अर्क को नमस्कार है । भास्कर को नमस्कार है। सविता सूर्य नारायण को नमस्कार है।
(ख)
आचार्या – अत्युत्तमम्। इदानीम् एकेन श्लोकेन सूर्यनमस्कारस्य बहूनि प्रयोजनानि वदामि । भवन्तः शृण्वन्तु अनुवदन्तु च।
आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥
एवं योगासनेषु सूर्यनमस्कारः एकः श्रेष्ठः आसनक्रमः अस्ति । सूर्यनमस्कारेण शारीरिक, मानसिकम्, आध्यात्मिकं च बलं
वर्धते। अतः वयं प्रतिदिनं सूर्यनमस्कारं करवाम । ‘स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः’ च प्राप्नवाम । अस्तु, पुनः अग्रिमकक्षायाम् अन्येषाम् आसनानां विषये ज्ञास्यामः ।
छात्रा: – धन्यवादाः आचार्ये!
शब्दार्थाः (Word Meanings) : अनुवदन्तु – पीछे बोलें (Repeat), प्रज्ञा – बुद्धि (Intelligence), वीर्यं – वीरता (Vigour), तेज: – कान्ति (Brilliance), आध्यात्मिकम् – आत्मा संबंधी (Spiritual), स्वस्थम् – रोगरहित (Healthy), अग्रिम – आगे की (Next)।
हिंदी अनुवाद (Hindi Translation): -
आचार्या – बहुत अच्छा! अब एक श्लोक से सूर्य नमस्कार के बहुत से प्रयोजन बताती हूँ । आप सब सुनो और पीछे-पीछे बोलो।
जो सूर्य को दिन-प्रतिदिन नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, बुद्धि, बल और तेज बढ़ता है।
इस प्रकार योगासनों में सूर्य नमस्कार एक श्रेष्ठ आसन है। सूर्य नमस्कार से शारीरिक, मानसिक और आत्मिक बल बढ़ता है। इसलिए हम रोज सूर्य नमस्कार करें और ( उसी से हम) निरोग शरीर और निरोग मन प्राप्त करें । अच्छा अब हम अगली कक्षा में दूसरे आसनों के विषय में जानेंगे।
सब छात्र – धन्यवाद आचार्या!

Post a Comment
please do not enter any spam link in the comment box.