Class 7 Sanskrit Chapter 4 Hindi Translation न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम् | NCERT Hindi Translation for Class 7 Sanskrit Deepakam दीपकम् Summary


Class 7 Sanskrit Chapter 4 Hindi Translation न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम् | NCERT Hindi Translation for Class 7 Sanskrit Deepakam दीपकम् Summary

Here are mention Sanskrit Class 7 Notes and NCERT Class 7 Sanskrit Chapter 2 Hindi Translation Summary Explanation Notes 
नित्यं पिबामः सुभाषितरसम्  to simplify complex chapters. Sanskrit Class 7 Chapter 4 Hindi Translation न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम् Summary


पाठ का परिचय (Introduction of the Lesson )



यह पाठ एक भूखे और प्यासे सियार की कहानी पर आधारित है, जो अपनी भूख मिटाने के लिए जंगल में भटकता है। वहाँ उसे अंगूर की बेल दिखाई देती है और वह उन्हें खाने के लिए उत्सुक हो जाता है। सियार अंगूर तक पहुँचने के लिए बार-बार उछलता और प्रयास करता है, लेकिन उनकी ऊँचाई के कारण वह सफल नहीं हो पाता। अंततः थककर वह अंगूरों को ‘खट्टा’ कहकर वहाँ से चला जाता है।

यह कथा हमें यह शिक्षा देती है कि जब मनुष्य किसी वस्तु को प्राप्त नहीं कर पाता, तो वह उसकी निंदा करके स्वयं को संतुष्ट करने की कोशिश करता है। साथ ही, यह पाठ हमें धैर्य, निरंतर प्रयास और अपनी असफलताओं का ईमानदारी से मूल्यांकन करने की प्रेरणा देता है। यह भी सिखाता है कि हमें हार को स्वीकार कर उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

इस पाठ में एक ऐसे सियार की कहानी प्रस्तुत की गई है, जो अत्यंत भूखा होता है। जंगल में अंगूर की बेल देखकर वह उन्हें पाने का भरसक प्रयास करता है, लेकिन उनकी ऊँचाई तक नहीं पहुँच पाता। अंत में निराश होकर वह बिना खाए ही अंगूरों को खट्टा कहकर लौट जाता है।
Class 7 Sanskrit Chapter 4 Summary Notes न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्  

पाठ – शब्दार्थ एवं सरलार्थ

शिक्षक: – प्रियच्छात्राः! एतत् चित्रं पश्यन्तु । चित्रे किं किम् अस्ति ?

एकः छात्रः – महोदय ! चित्रे वृक्षे अस्ति ।

एका छात्रा – महोदय ! शृगालः अस्ति । द्राक्षाफलानि अपि सन्ति ।

शिक्षक: – बहु सम्यक्। शृगालः किं करोति ?

द्वितीयः छात्रः – आचार्य! शृगालः द्राक्षाफलानि खादितुम् इच्छति । किन्तु न शक्नोति ।

शिक्षकः – अहो ! भवन्तः कथं जानन्ति ?

एका छात्रा – महोदय! वयम् एतां कथां मातृभाषया श्रुतवन्तः।

शिक्षक: – बहु समीचीनम्। तर्हि संस्कृतभाषायाम् एतां कथां गीतरूपेण गायामः अभिनयं च कुर्मः ।

एकः छात्रः – – अस्तु आचार्य! कृपया पाठयतु।

शब्दार्थाः (Word Meanings) : पश्यन्तु – सब देखो (Look), वृक्ष: – पेड़ (Tree), शृगालः – सियार (Jackal), द्राक्षाफलानि – अंगूर (Grapes), सम्यक्-ठीक है (Right), भवन्तः – आप सब (You), श्रुतवन्तः – सुना है (Listened)।

सरलार्थ-

शिक्षक – प्रिय छात्रो! इस चित्र को देखो । चित्र में क्या – क्या है ?
एक छात्र – श्रीमान जी ! चित्र में पेड़ है।
एक छात्रा – महोदय ! सियार, अंगूर भी हैं।
शिक्षक – बहुत अच्छा! सियार क्या कर रहा है?
द्वितीय छात्र – आचार्य! सियार अंगूर खाना चाहता है, किन्तु खा नहीं सकता।
शिक्षक – ओह! आप कैसे जानते हो?
एक छात्रा – महोदय! हम सबने इस कहानी को मातृभाषा में सुना है।
शिक्षक – बहुत ठीक। तो संस्कृत भाषा में इस कथा को गीत रूप में गाते हैं और अभिनय करते हैं।
एक छात्र – जी आचार्य! कृपया पढ़ाइए ।

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(क) 
एकः शृगालः
एकः शृगालः वनं गच्छति ।
पिपासा, तस्य बुभुक्षा
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति
सः वनं गच्छति, सः वनं गच्छति।
तत्र गच्छति, किमपि न लभते
इतोऽपि गच्छति, किमपि न लभते
श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते
सः श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते
किं च करोति ? सः किं च करोति ?
वामतः पश्यति, दक्षिणतः पश्यति
अग्रतः पश्यति, पृष्ठतः पश्यति
स्वेदः जायते, तृषा जायते
तस्य स्वेदः जायते, तृषा जायते

शब्दार्थाः (Word Meanings) : शृगालः – सियार (Jackal), वनं – अरण्य (Forest), पिपासा – प्यास (Thirst), बुभुक्षा- भूख (Hunger), किमपि – कुछ भी (Anything), इतोऽपि – (इत: + अपि) और भी (More than this), लभते –पाता है (Gets), श्रान्तः – थका हुआ (Tired), खिन्नः – खेद से युक्त (Sad), जायते – होता है (Becomes), वामतः –बायीं ओर (Towards left), दक्षिणतः – दाहिनी ओर (Towards right), अग्रतः – आगे (In front), पृष्ठतः – पीछे (Behind), स्वेद: – पसीना (Sweat); तृषा – प्यास (Thirst)।

 
हिंदी अनुवाद (Hindi Translation) : 
एक सियार,
वह जंगल में जाता है।
प्यासा, भूखा
प्यास से, भूख से, जंगल में जाता है
वह जंगल में जाता है, वह जंगल में जाता है।
वहाँ जाता है, कुछ भी नहीं मिलता है।
यहाँ से भी जाता है, कुछ भी नहीं मिलता है

थक जाता है, दुखी हो जाता है।
वह थक जाता है, दुखी हो जाता है।
और क्या करता है? वह और क्या करता है?
बाईं ओर से देखता है, दाईं ओर से देखता है
आगे से देखता है, पीछे से देखता है।
पसीना आ जाता है, प्यास लग जाती है।
उसको पसीना आता है, प्यासा हो जाता है।


(ख)

किं च पश्यति? सः किं च पश्यति?
किं च पश्यति? सः किं च पश्यति?
पश्यति द्राक्षालतां
सः पश्यति द्राक्षाफलम्
उपरि उपरि लतासु दृश्यते च तत्फलम्
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते
किं च करोति ? सः किं च करोति ?
एकवारम् उत्पतति, द्विवारम् उत्पतति
त्रिवारम् उत्पतति, पुन: पुनः उत्पतति
स्वेदः जायते, तस्य श्रमः जायते
किं कथयति ? सः किं कथयति ?
आम्लं द्राक्षाफलम्, आम्लं द्राक्षाफलम्
इत्येवं कथयति, सः पलायते
इत्येवं कथयति, सः पलायते ।।



शब्दार्थाः (Word Meanings) : 
द्राक्षालताम् – अंगूर की बेल (Grape vine climber), उपरि – ऊपर (Above), दृश्यते – दिखता है (Seen), अनुक्षणं-तुरंत (Immediately), रस: – लार (Saliva), एकवारम् – एक बार (Once), द्विवारम् – दूसरी बार (Twice), उत्पतति-कूदता है (Jumps), पुन: पुन: – बार – बार (Frequently), कथयति – कहता है (Tells), आम्लम् – खट्टा (Sour), द्राक्षाफलम्-अंगूर (Grapes), पलायते – भाग जाता है (Runs away)।


हिंदी अनुवाद (Hindi Translation) : 

और क्या देखता है? वह और क्या देखता है?
और क्या देखता है? वह और क्या देखता है?
देखता है अंगूर की बेल
वह देखता है अंगूर
लताओं के ऊपर ऊपर दिखते हैं उसको वह फल
उसी समय उसके मुँह में पानी आ जाता है
और क्या करता है? वह और क्या करता है?
एक बार कूदता है, दो बार कूदता है
तीन बार कूदता है, बार-बार कूदता है।
पसीना आता है, उसकी मेहनत (बेकार) हो जाती है।
क्या कहता है? वह क्या कहता है ?
खट्टा अंगूर, खट्टा अंगूर
ऐसा कहते हुए वह भाग जाता है।
ऐसा कहते हुए वह भाग जाता है।

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