Class 9 Sanskrit Iravati Chapter 11 आर्यभटः | NCERT Translation, Question Answrs & Solutions
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एकादशः पाठः — आर्यभटः (Chapter 11 : Aryabhata)
पाठ-परिचयः
Introduction to the lesson:
India has an invaluable treasure of a long tradition of knowledge and science. The enlightened sages have cherished this tradition. Among these sages, the foremost was Aryabhata. An early user of the decimal system, Aryabhata gave a new direction to mathematics. These sages and the principles they propounded had to face opposition from the orthodox of the time. In fact, they were the first Acharyas to make mathematics a science and to propound the motion of celestial bodies through mathematical calculation methods. The introduction to this scholarship of Acharya Aryabhata is presented in the text.
मूलपाठः आर्यभटः
पूर्वदिशायाम् उदिते सूर्यः पश्चिमदिशायां च अस्तं गच्छति इति दृश्यते हि लोके। परं न अनेन अवबोध्यमस्ति यत्सूर्यो गतिशील इति। सूर्योSचलः पृथिवी च चला या स्वकीये अक्षे घूर्णति इति साम्प्रतं सुस्थापितः सिद्धांतः। सिद्धांतोंsयम् प्राथम्येन येन प्रवर्तितः, स आसीत् महान् गणितज्ञः ज्योतिर्विच्च आर्यभटः। पृथिवी स्थिरा वर्तते इति परम्परया प्रचलिता रूढ़िः तेन प्रत्यादिष्टा। तेन उदाहृतं यद् गतिशीलायां नौकायाम उपदिष्टः मानवः नौकां स्थिारमानुभवति, अन्यान च पदार्थान गतिशीलान अवगच्छति। एवमेव गतिशीलाया पृथिव्यां अवस्थितः मानवः पृथिवीं स्थिरामनुभवति सूर्यादिग्रहान् च गतिशीलान् वेत्ति।
हिन्दी अनुवाद :
संसार में यह दिखाई देता है कि सूर्य पूर्व दिशा में उदय होता है और पश्चिम दिशा में अस्त होता है परन्तु इससे यह नहीं जाना जाता है कि सूर्य गतिशील है। सूर्य अचल है और पृथ्वी चलमान है जो अपनी धुरी पर घूमती है यह इस समय भली-भाँति स्थापित सिद्धांत है। इस सिद्धांत को सर्वप्रथम जिसने प्रारम्भ किया, वह महान गणित का ज्ञाता और ज्योतिषी आर्यभट था। पृथ्वी स्थिर है, परम्परा से चली आ रही इस प्रथा का उन्होंने खण्डन किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि चलती हुई नाव में बैठा हुआ मनुष्य नाव को रुकी हुई अनुभव करता है और दूसरे पदार्थों को गतिशील समझता है। इसी तरह ही गति युक्त पृथ्वी पर स्थित मनुष्य पृथ्वी को स्थिर अनुभव करता है और सूर्य आदि ग्रहों को गतिशील जानता है।
English Translation :
It is visible in the world that the sun rises in the east and sets in the west, but this does not mean that the sun is in motion. It is now a well-established principle that the sun is stationary and the earth is mobile, rotating on its axis. The first person to introduce this principle was the great mathematician and astrologer Aryabhata. He refuted the traditional practice that the earth is stationary. He gave the example that a person sitting in a moving boat experiences the boat as stationary and considers other objects to be in motion. Similarly, a person sitting on the moving earth experiences the earth as stationary and considers the sun and other planets to be in motion.
ख। 476 तमे ख्रिस्ताब्दे (षटसप्तत्यधिक्चतः शततमे वर्षे) आर्यभटः जन्म लब्ध-वानिति तेनैव विरचिते "आर्यभटीयम्" इत्यस्मिन् ग्रन्थे उल्लिखितम। ग्रन्थोSयं तेन त्रायोविंशतितमे वयसि विरचितः। ऐतिहासिकस्त्रोतोभिः ज्ञायते यत् पाटलिपुत्रं निकषा आर्यभटस्य वेधशाला आसीत्। अनेन इदम अनुमीयते यत तस्य कर्मभूमिः पाटलिपुत्रमेव आसीत्।
हिन्दी अनुवाद :
सन ४७६ वें ईस्वीय वर्ष में (चार सौ छिहत्तरवें वर्ष में ) आर्यभट ने जन्म लिया, यह उन्होंने अपने द्वारा ही लिखे " आर्यभटीयम " नामक इस ग्रन्थ में उल्लेख किया है। यह ग्रन्थ उन्होंने तेईसवें वर्ष की आयु में रचा था। ऐतिहासिक स्त्रोतों से जाना जाता है कि पाटलिपुत्र के निकट आर्यभट की नक्षत्रों को जानने की प्रयोगशाला थी। इससे यह अनुमान किया जाता है कि उनका कार्य क्षेत्र पाटलिपुत्र ही था।
English Translation :
Aryabhata was born in the year 476 AD (476th year of his reign), as mentioned in his own treatise, "Aryabhatiyam." He wrote this treatise at the age of twenty-three. Historical sources indicate that Aryabhata had a laboratory for studying the constellations near Pataliputra. This suggests that Pataliputra was his field of work.
ग। आर्यभटस्य योगदानं गणितज्योतिषा सम्बंद्ध वर्तते यत्र संख्यानाम् आकलनं महत्वं आदधाति। आर्यभटः फलितज्योतिषशास्त्रो न विश्वसिति स्म। गणितीयपद्धत्या कृतं आकलनमाधृत्य एव तेन प्रतिपदितं यद् ग्रहणे राहुकेतुनामकौ दानवौ नास्ति कारणम्। तत्र तु सूर्यचन्द्रपृथिवी इति त्रीणि एव कारणानि। सूर्यं परितः भ्रमन्त्याः पृथिव्याः, चन्द्रस्य परिक्रमापथेन संयोगाद् ग्रहणं भवति। यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते तदा चन्द्रग्रहणं भवति। तथैव पृथ्वीसूर्ययोः मध्ये समागतस्य चन्द्रस्य छायापातेन सूर्यग्रहणं दृश्यते।
हिन्दी अनुवाद :
आर्यभट का योगदान गणितज्योतिष से सम्बन्ध रखता है जहाँ संख्याओं की गणना महत्व रखती है। आर्यभट फलित ज्योतिषशास्त्र में विश्वास नहीं करते थे। गणित शास्त्र की पद्धति से किए गए आकलन पर आधरित करके ही उन्होंने कहा कि ग्रहण में राहु और केतु नामक राक्षस कारण नहीं है। वहाँ पर सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी ये तीनों ही कारण हैं। सूर्य के चारों ओर घूमती हुई पृथ्वी का चन्द्रमा के घूमने के मार्ग के संयोग से ग्रहण होता है। जब पृथ्वी की छाया पड़ने से चन्द्रमा का प्रकाश रुक जाता है तब चन्द्र ग्रहण होता है। वैसे ही पृथ्वी और सूर्य के बीच में आए हुए चन्द्रमा की परछाई से सूर्य ग्रहण दिखाई पड़ता है।
ग। आर्यभटस्य योगदानं गणितज्योतिषा सम्बंद्ध वर्तते यत्र संख्यानाम् आकलनं महत्वं आदधाति। आर्यभटः फलितज्योतिषशास्त्रो न विश्वसिति स्म। गणितीयपद्धत्या कृतं आकलनमाधृत्य एव तेन प्रतिपदितं यद् ग्रहणे राहुकेतुनामकौ दानवौ नास्ति कारणम्। तत्र तु सूर्यचन्द्रपृथिवी इति त्रीणि एव कारणानि। सूर्यं परितः भ्रमन्त्याः पृथिव्याः, चन्द्रस्य परिक्रमापथेन संयोगाद् ग्रहणं भवति। यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते तदा चन्द्रग्रहणं भवति। तथैव पृथ्वीसूर्ययोः मध्ये समागतस्य चन्द्रस्य छायापातेन सूर्यग्रहणं दृश्यते।
हिन्दी अनुवाद :
आर्यभट का योगदान गणितज्योतिष से सम्बन्ध रखता है जहाँ संख्याओं की गणना महत्व रखती है। आर्यभट फलित ज्योतिषशास्त्र में विश्वास नहीं करते थे। गणित शास्त्र की पद्धति से किए गए आकलन पर आधरित करके ही उन्होंने कहा कि ग्रहण में राहु और केतु नामक राक्षस कारण नहीं है। वहाँ पर सूर्य, चन्द्रमा और पृथ्वी ये तीनों ही कारण हैं। सूर्य के चारों ओर घूमती हुई पृथ्वी का चन्द्रमा के घूमने के मार्ग के संयोग से ग्रहण होता है। जब पृथ्वी की छाया पड़ने से चन्द्रमा का प्रकाश रुक जाता है तब चन्द्र ग्रहण होता है। वैसे ही पृथ्वी और सूर्य के बीच में आए हुए चन्द्रमा की परछाई से सूर्य ग्रहण दिखाई पड़ता है।
English Translation :
Aryabhata's contribution is related to mathematical astrology, where calculation of numbers is important. Aryabhata did not believe in predictive astrology. Based on the calculation done through mathematical method, he said that the demons named Rahu and Ketu are not the cause of eclipse. There, the Sun, Moon and Earth are the three causes. Eclipse occurs due to the combination of the path of the Earth revolving around the Sun and the Moon's rotation. Lunar eclipse occurs when the light of the Moon is blocked due to the shadow of the Earth. Similarly, solar eclipse is visible due to the shadow of the Moon coming between the Earth and the Sun.
घ। समाजे नूतनानां विचाराणा स्वीकारे प्रायः सामान्यजनाः काठिन्यमनुभवन्ति। भारतीयज्योतिः शास्त्रो तथैव आर्यभटस्यापि विरोधः अभवत्। तस्य सिद्धान्ताः उपेक्षिताः। स पण्डितम्मन्यानाम् उपहासपात्रं जातः। पुनरपि तस्य दृष्टिः कालातिगामिनी। दृष्टा। आधुनिकैः तस्मिन्, तस्य च सिद्धान्ते समादरः प्रकटितः। अस्मादेव कारणाद् अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम आर्यभट इति कृतं। वस्तुतः भारतीयायाः गणितपरम्परायाः अथ च विज्ञानपरम्परायाः असौ एकः शिखरपुरुषः आसीत्।
हिन्दी अनुवाद :
समाज में नए विचारों को स्वीकार करने में अधिकतर सामान्य लोग कठिनाई को अनुभव करते हैं। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में वैसे ही आर्यभट का विरोध हुआ। उनके सिद्धान्त अनसुने कर दिए गए। वह स्वयं को भारी विद्वान मानने वालों की हँसी का पात्र बन गए फिर भी उनकी दृष्टि समय को लाँघने वाली देखी गई। किन्तु आधुनिक वैज्ञानिकों ने उनमें, और उनके सिद्धान्त में आदर प्रकट किया। इसी कारण से हमारे पहले उपग्रह का नाम आर्यभट रखा गया।
वास्तव में भारत की गणित परम्परा के और विज्ञान की परम्परा के वह एक शिखर पुरुष थे।
घ। समाजे नूतनानां विचाराणा स्वीकारे प्रायः सामान्यजनाः काठिन्यमनुभवन्ति। भारतीयज्योतिः शास्त्रो तथैव आर्यभटस्यापि विरोधः अभवत्। तस्य सिद्धान्ताः उपेक्षिताः। स पण्डितम्मन्यानाम् उपहासपात्रं जातः। पुनरपि तस्य दृष्टिः कालातिगामिनी। दृष्टा। आधुनिकैः तस्मिन्, तस्य च सिद्धान्ते समादरः प्रकटितः। अस्मादेव कारणाद् अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम आर्यभट इति कृतं। वस्तुतः भारतीयायाः गणितपरम्परायाः अथ च विज्ञानपरम्परायाः असौ एकः शिखरपुरुषः आसीत्।
हिन्दी अनुवाद :
समाज में नए विचारों को स्वीकार करने में अधिकतर सामान्य लोग कठिनाई को अनुभव करते हैं। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में वैसे ही आर्यभट का विरोध हुआ। उनके सिद्धान्त अनसुने कर दिए गए। वह स्वयं को भारी विद्वान मानने वालों की हँसी का पात्र बन गए फिर भी उनकी दृष्टि समय को लाँघने वाली देखी गई। किन्तु आधुनिक वैज्ञानिकों ने उनमें, और उनके सिद्धान्त में आदर प्रकट किया। इसी कारण से हमारे पहले उपग्रह का नाम आर्यभट रखा गया।
वास्तव में भारत की गणित परम्परा के और विज्ञान की परम्परा के वह एक शिखर पुरुष थे।
English Translation :
Most ordinary people find it difficult to accept new ideas in society. Aryabhata faced similar opposition in Indian astrology. His theories were ignored. He became the butt of ridicule among those who considered themselves great scholars, yet his vision was seen as transcending time. However, modern scientists showed respect for him and his theory. This is why our first satellite was named Aryabhata.
He was truly a leading figure in India's mathematical and scientific tradition.
वयम् अभ्यासं कुर्मः
क. कः सुस्थापितः सिद्धान्तः?
ख. चन्द्रग्रहणं कथं भवति?
ग. सूर्यग्रहणं कथं दृश्यते?
घ. आर्यभटस्य विरोधः किमर्थमभवत्?
ङ. प्रथमोपग्रहस्य नाम आर्यभटः इति कथं कृतम्?
उत्तरम् :
(क) सूर्योsचलः पृथिवी तु चला या स्वकीये अक्षे घूर्णति इति साम्प्रतं सुस्थापितः सिद्धान्तः।
(ख) यदा पृथिव्याः छाया चन्द्रे पतति तदा चन्द्रग्रहणं भवति।
(ग) यदा चन्द्रः सूर्यं पृथिवीं च मध्ये आगच्छति तदा सूर्यग्रहणं दृश्यते।
(घ) नूतनानां विचाराणां स्वीकरणे रूढिवादिभिः सह आर्यभटस्य विरोधः अभवत्।
(ङ) आधुनिकैः वैज्ञनिकैः तस्मिन्, तस्य च सिद्धान्ते समादरः प्रकटितः। अस्मादेव कारणाद् अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम आर्यभटः इति कृतम्।
२. मञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत —
मञ्जूषा: [ तदा, पृथिवी, नौकाम्, चला, अस्तं ]
क. सूर्यः पूर्वदिशायाम् उदेति पश्चिमदिशायां च ____________ गच्छति।
ख. सूर्यः अचलः पृथिवी तु ____________।
ग. ____________ स्वकीये अक्षे घूर्णति।
घ. यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते ____________ चन्द्रग्रहणं भवति।
ङ. नौकायाम् उपविष्टः मानवः ____________ स्थिरामनुभवति।
उत्तरम् :
क. सूर्यः पूर्वदिशायाम् उदेति पश्चिमदिशायां च अस्तं गच्छति।
ख. सूर्यः अचलः पृथिवी तु चला।
ग. पृथिवी स्वकीये अक्षे घूर्णति।
घ. यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते तदा चन्द्रग्रहणं भवति।
ङ. नौकायाम् उपविष्टः मानवः नौकाम् स्थिरामनुभवति।
३. सन्धिविच्छेदं कुरुत —
क. ग्रन्थोऽयम्
ख. सूर्याचलः
ग. तथैव
घ. कालातिगामिनी
ङ. प्रथमोपग्रहस्य
उत्तरम् :
क. ग्रन्थोऽयम् = ग्रन्थः + अयम
ख. सूर्याचलः = सूर्य + अचलः
ग. तथैव = तथा + एव
घ. कालातिगामिनी = काल + अतिगामिनी
ङ. प्रथमोपग्रहस्य = प्रथम + उपग्रहस्य
क. उदयः
ख. अचलः
ग. अन्धकारः
घ. स्थिरः
ङ. समादरः
च. आकाशस्य (आकाशस्यः)
उत्तरम् :
क. उदयः = अस्तः
ख. अचलः = चलः
ग. अन्धकारः = प्रकाशः
घ. स्थिरः = गतिशीलः
ङ. समादरः = उपहासः
च. आकाशस्य (आकाशस्यः) = पृथिव्याः
क्रियाकलापः
- कस्यापि एकस्य भारतीय-विदुषः तस्य कृतिं च लिखत, यः गणित-विज्ञान क्षेत्रे महत् योगदानं कृतवान् अस्ति।
- आर्यभटं विहाय कस्यापि एकस्य भारतीयगणितज्ञस्य नामोल्लेखपूर्वकं तस्य प्रमुख-योगदानस्य संक्षिप्तं वर्णनं [कुरुत]।
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