Class 9 Sanskrit Iravati Chapter 7 विद्यामहिमा | NCERT Translation, Question Answrs & Solutions

Class 9 Sanskrit Iravati Chapter 7 विद्यामहिमा | NCERT Translation, Question Answrs & Solutions

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इरावती कक्षा ९ — सप्तमः पाठः विद्यामहिमा

Chapter 7: The Glory of Knowledge


पाठ-परिचय — Introduction

प्रस्तुत पाठ विद्या के महत्त्व को प्रतिपादित करने वाली सूक्तियों को समाहित करते हुए विद्या की महिमा को बताता है। पाठ में ये सूक्तियाँ हितोपदेश (आचार्य नारायण पण्डित विरचित), पञ्चतन्त्र (आचार्य विष्णुशर्मा विरचित) तथा अन्य प्रचलित सूक्ति-ग्रन्थों से संकलित की गई हैं। विनम्रता एवं सदाचार को स्थापित करती ये सूक्तियाँ विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास को लक्षित करती हैं।

This lesson presents the glory and importance of knowledge through a collection of wise sayings. These sayings have been selected from the Hitopadesha of Acharya Narayana Pandita, the Panchatantra of Acharya Vishnu Sharma, and other popular collections of wise maxims. These sayings promote humility and ethical conduct and aim at the all-round development of students.

(१)
न चौरहार्यं न च राजहार्यं
न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं
विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥

हिन्दी अर्थ: विद्या रूपी धन को न तो चोर चुरा सकता है, न राजा छीन सकता है और न ही भाइयों में उसका बँटवारा हो सकता है। इसे खर्च करने पर यह प्रतिदिन बढ़ता ही जाता है। इसलिए विद्या का धन सभी धनों में श्रेष्ठ है।

English Meaning: The wealth of knowledge cannot be stolen by thieves, confiscated by a king, or divided among brothers. Unlike material wealth, it increases every day when it is shared or spent. Therefore, the wealth of knowledge is the most valuable of all kinds of wealth.

पदच्छेदः  न चौरहार्यम् न च राजहार्यम् न भ्रातृभाज्यम् न च भारकारि व्यये कृते वर्धते एव नित्यम् विद्याधनम् सर्वधनप्रधानम्।
 
अन्वयः —  विद्याधनं चौरहार्यं न, राजहार्यं च न, भ्रातृभाज्यं च न, भारकारि च न अस्ति। एतत् व्यये कृते नित्यं वर्धते एव। तस्मात् विद्याधनं सर्वधनप्रधानम् अस्ति।
 
भावार्थ — इस श्लोक का भाव है कि संसार में विद्याधन सबसे श्रेष्ठ धन है। इसे चोर चुरा नहीं सकते और राजा भी इसे छीन नहीं सकता। भाइयों में इसका विभाजन भी नहीं किया जा सकता। इसके विपरीत, विद्या बाँटने अथवा खर्च करने पर बढ़ती जाती है और कभी नष्ट नहीं होती। इसलिए विद्याधन सभी धनों में प्रधान है।
 
English Meaning: Knowledge is the greatest wealth. No thief can steal it, no king can confiscate it, and it cannot be divided among brothers. In fact, knowledge increases when it is shared. Therefore, knowledge is superior to material wealth.

(२)
विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।
पात्रत्वाद्धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

हिन्दी अर्थ :
विद्या विनय प्रदान करती है। विनय से मनुष्य पात्रता प्राप्त करता है। पात्रता से धन प्राप्त होता है। धन से धर्म का पालन होता है और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
 
English Meaning: Knowledge gives humility. From humility comes worthiness. From worthiness one obtains wealth; from wealth comes the ability to perform one's duties and follow righteousness, and from righteousness comes happiness.
 
पदच्छेदः विद्या ददाति विनयम्। विनयात् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनम् आप्नोति। धनात् धर्मम् आप्नोति। ततः सुखम्।
 
अन्वयः विद्या विनयं ददाति, (जनः) विनयात् पात्रतां याति, पात्रत्वात् धनम् आप्नोति, धनात् धर्मम् (आप्नोति), ततः (च) सुखम् (आप्नोति)।

भावार्थ — इस श्लोक का भाव है कि ज्ञान मनुष्य में विनम्रता उत्पन्न करता है। जब मनुष्य विनम्र होता है, तब समाज में उसे योग्यता और पात्रता प्राप्त होती है। योग्यता के कारण मनुष्य धन अर्जित करता है और धन के कारण वह परोपकार आदि अच्छे कार्य करता है। इन अच्छे कार्यों के प्रभाव से वह जीवन में स्थायी सुख प्राप्त करता है। अतः विद्या सुख का मूल है।
 
English Meaning:  Knowledge makes a person humble. A humble person becomes worthy and capable in society. Because of his ability, he earns wealth and uses it for good and charitable purposes. Such conduct ultimately brings lasting happiness. Therefore, knowledge is the foundation of happiness.

(३)
अपूर्वः कोऽपि कोशोऽयं विद्यते तव भारति।
व्ययतो वृद्धिमायाति क्षयमायाति सञ्चयात्॥

हिन्दी अर्थ : हे सरस्वती! आपके पास एक अद्भुत ज्ञान-रूपी खजाना है। इसे खर्च करने अर्थात् बाँटने से यह बढ़ता है, लेकिन इसे संचित करके रखने से इसका क्षय होता है।
 
English Meaning: O Goddess Saraswati! You possess a wonderful treasure of knowledge. This treasure increases when it is spent or shared, but it diminishes when it is merely accumulated and kept unused.

पदच्छेदः अपूर्वः कः अपि कोशः अयम् विद्यते तव भारति। व्ययतः वृद्धिम् आयाति क्षयम् आयाति सञ्चयात्।

अन्वयः — हे भारति! तव अयम् कः अपि अपूर्वः कोशः विद्यते, (यतः) व्ययतः वृद्धिम् आयाति, सञ्चयात् (च) क्षयम् आयाति।

भावार्थ: — हे सरस्वती! आपके पास विद्या रूपी एक अद्भुत खजाना है। संसार में सामान्यतः धन व्यय करने से कम होता है, परन्तु विद्याधन व्यय करने अर्थात् दूसरों को देने से बढ़ता है। यदि इस ज्ञान-रूपी धन को केवल सुरक्षित रखा जाए और दूसरों को न दिया जाए, तो धीरे-धीरे उसका क्षय हो जाता है।


(४)
विद्वत्त्वं च नृपत्वं च नैव तुल्ये कदाचन।
स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते॥

हिन्दी अर्थ: 
विद्वत्ता और राजपद कभी भी समान नहीं हो सकते। राजा केवल अपने देश में सम्मानित होता है, जबकि विद्वान व्यक्ति हर जगह सम्मान प्राप्त करता है।
 
English Meaning: Scholarship and kingship can never be considered equal. A king is respected only in his own country, whereas a learned person is respected everywhere.
 
पदच्छेदः  विद्वत्त्वम् च नृपत्वम् च न एव तुल्ये कदाचन। स्वदेशे पूज्यते राजा, विद्वान् सर्वत्र पूज्यते।
 
अन्वयः — विद्वत्त्वं च नृपत्वं च कदाचन तुल्ये न एव (भवतः)। यतः राजा स्वदेशे एव पूज्यते, (परन्तु) विद्वान् तु सर्वत्र पूज्यते।
 
भावार्थ: — ज्ञानवान व्यक्ति का सम्मान किसी एक स्थान तक सीमित नहीं होता। राजा का अधिकार उसके राज्य की सीमा तक रहता है, लेकिन विद्वान व्यक्ति अपने ज्ञान के कारण हर स्थान पर सम्मान प्राप्त करता है। इसलिए विद्वत्ता राजपद से श्रेष्ठ है।

(५)
किं कुलेन विशालेन विद्याहीनस्य देहिनः।
अकुलीनोऽपि विद्यावान्देवैरपि स पूज्यते॥

हिन्दी अर्थ : 
जिस मनुष्य के पास विद्या नहीं है, उसके लिए बड़े और प्रतिष्ठित कुल में जन्म लेने का क्या लाभ? निम्न कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी यदि विद्वान है तो देवताओं द्वारा भी सम्मानित किया जाता है।
 
English Meaning: What is the use of being born in a great and prestigious family if a person is devoid of knowledge? Even a person born in a humble family is honoured by the gods if he is learned.
 
पदच्छेदः —किम् कुलेन विशालेन विद्याहीनस्य देहिनः। अकुलीनः अपि विद्यावान् देवैः अपि पूज्यते।

अन्वयः—विद्याहीनस्य देहिनः विशालेन कुलेन किम्? अकुलीनः अपि (यः) विद्यावान् (अस्ति), सः देवैः अपि पूज्यते।

भावार्थ — यदि कोई मनुष्य ज्ञानहीन है, तो ऊँचे कुल में जन्म लेने पर भी उसे वास्तविक सम्मान नहीं मिलता। लेकिन यदि कोई व्यक्ति साधारण या निम्न कुल में जन्म लेकर भी विद्वान बनता है, तो उसका सम्मान देवताओं द्वारा भी किया जाता है। इसलिए ऊँचे कुल में जन्म से अधिक महत्त्व विद्या का है।
 
English Meaning: A person's greatness does not come merely from belonging to a prestigious family. If a person lacks knowledge, high birth has little value. On the other hand, a learned person from a humble family earns great respect. Thus, knowledge is more important than family status.

 
वयं शब्दार्थान् जानीमः
 

 शब्दः

 अर्थः

 हिन्दी

 English

चौरहार्यम्   

चौरैः हरणीयम्

चोरों द्वारा चुराया जा सकने वाला

 Stealable

राजहार्यम्   

नृपेण हरणीयम्

राजा द्वारा छीना जा सकने वाला

 Confiscable by a king

भ्रातृभाज्यम् 


बन्धुभिः विभाज्यम् 

भाइयों में बाँटने योग्य 

Divisible among brothers

भारकारि 

भारभूतम् / भारकारकम् 

बोझ बढ़ाने वाला 

Burdensome

व्ययः 

उद्व्ययः 

खर्च

Expenditure

विद्याधनम्  

ज्ञानसम्पत्तिः 

ज्ञानरूपी धन 

Wealth of knowledge

विनयः   

विनम्रता

नम्रता

Humility

पात्रता  

योग्यता

क्षमता / योग्यता

Worthiness

धर्मः  

सदाचारः

धर्म, कर्तव्य

Righteousness

सुखम्  

आनन्दः

प्रसन्नता

Happiness

कोशः  

भाण्डागारः

खजाना

Treasure

अपूर्वः   

अद्वितीयः

अनोखा

Unique

वृद्धिम्   

वर्धनम्

वृद्धि

Growth

क्षयम्  

हासः

नष्ट होना / ह्रास

Decline

विद्वत्त्वम्   

पाण्डित्यम्

विद्वत्ता

Wisdom

नृपत्वम्   

राजत्वम्

राजपद

Kingship

स्वदेशे   

स्वदेशे

अपने देश में

 In one's own country

पूज्यते  

वन्द्यते 

पूजा की जाती है

Worshipped / respected

अकुलीनः  

अप्रशस्तकुलसम्भवः

अप्रतिष्ठित कुल में जन्मा 

Of humble birth

भारति   

हे शारदे / हे सरस्वति

हे सरस्वती

O Saraswati!

देहिनः   

शरीरधारिणः

मनुष्य का

Of human being

विनयः 

विनम्रता 

नम्रता 

Humility

पात्रता 

योग्यता

क्षमता 

Worthiness

 धर्मः 

सदाचारः 

धर्म, कर्तव्य

Righteousness

 सुखम्

आनन्दः

 प्रसन्नता 

Happiness

कोशः 

भाण्डागारः

खजाना 

Treasure

अपूर्वः 

अद्वितीयः

अनोखा

Unique

वृद्धिम् 

वर्धनम् 

वृद्धि 

Growth

क्षयम्

हासः 

नष्ट होना

Decline

विद्वत्त्वम् 

पाण्डित्यम् 

राजपद  

Kingship

नृपत्वम् 

राजत्वम् 

अपने देश में

In one's own country

स्वदेशे 

स्वदेशे 

अपने देश में

In one's own country

पूज्यते 

वन्द्यते 

पूजा की जाती है 

Worshipped



अत इदम् अवधेयम्

१. पाठस्य मुख्यसन्देशः — 

संस्कृत:
विद्या सर्वश्रेष्ठं धनं वर्तते। संसारे अन्यानि सर्वाणि धनानि (सुवर्णं, रजतं, भूमिः च) केनापि अपहर्तुं शक्यन्ते, अथवा व्यये कृते तानि न्यूनानि भवन्ति। परन्तु विद्याधनं वितराणात् (अव्ययतः/दानात्) सदैव वर्धते। कुलस्य अपेक्षया गुणस्य महत्त्वम् अधिकं भवति। मनुष्यस्य वास्तविकः परिचयः तस्य उच्चकुलेन (प्रतिष्ठितवंशेन) न भवति, अपि तु तस्य ज्ञानगुणेन तथा च नम्रतया (विनयेन) भवति।

Hindi:
विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है। संसार की अन्य सभी वस्तुएँ जैसे सोना, चाँदी और भूमि चोरी या नष्ट की जा सकती हैं अथवा खर्च करने पर कम हो जाती हैं। लेकिन विद्या बाँटने से बढ़ती है। मनुष्य की पहचान उसके ऊँचे कुल से नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, गुण और विनम्रता से होती है।

English:
Knowledge is the greatest wealth. Other forms of wealth such as gold, silver and land may be stolen or diminished through use. Knowledge, however, increases when it is shared. A person's true identity is determined not by high birth but by knowledge, qualities and humility.
 
राजशक्ति और विद्वत्ता

एकस्य राज्ञः शक्तिः आदरः च केवलं तस्य राज्यसीमायां (स्वदेशे) एव सीमितः भवति, परन्तु एकः शिक्षितः विद्वान् जनः सम्पूर्णे संसारे (सर्वत्र) गौरवं सम्मानं च लभते।

Hindi: राजा की शक्ति और सम्मान उसके अपने राज्य तक सीमित रहते हैं, लेकिन एक विद्वान व्यक्ति को पूरे संसार में सम्मान प्राप्त हो सकता है।

English: The power and respect of a king are generally limited to his kingdom, whereas a learned person can receive honour and respect everywhere.
 
निष्कर्ष

संस्कृत: इत्यं विद्यायाः महत्त्वं प्रतिपादयन्त्यः एताः पण्डिताः एवं सन्देशं ददति यत् विद्या अर्थात् ज्ञानम् एव धनं, यशः, सम्मानं च युगपत् (एकस्मिन्) प्राप्तुं शक्नुमः।

Hindi: इस प्रकार ये सूक्तियाँ यह संदेश देती हैं कि विद्या अर्थात् ज्ञान से धन, यश और सम्मान एक साथ प्राप्त किए जा सकते हैं।

२. सन्धि-विच्छेदः —

2. सन्धि-विच्छेद

कः + अपि = कोऽपि कः + अपि — उत्व-विसर्गसन्धिः

कोशः + अयम् = कोशोऽयम् कोशः + अयम् — उत्व-विसर्गसन्धिः
वृद्धिम् + आयाति = वृद्धिमायाति वृद्धिम् + आयाति — संयोग/अनुस्वारसन्धिः
क्षयम् + आयाति = क्षयमायाति क्षयम् + आयाति — संयोग/अनुस्वारसन्धिः
पात्रत्वात् + धनम् = पात्रत्वाद्धनम् पात्रत्वात् + धनम् — जश्त्व-व्यञ्जनसन्धिः
धनात् + धर्मम् = धनाद्धर्मम् धनात् + धर्मम् — जश्त्व-व्यञ्जनसन्धिः
अकुलीनः + अपि = अकुलीनोऽपि अकुलीनः + अपि — उत्व-विसर्गसन्धिः

३. महत्त्वपूर्णाः अव्ययशब्दाः — Important Indeclinables

न — नहीं — not
च — और — and
एव — ही — only / indeed
नित्यम् — हमेशा — always
अपि — भी — also
कदाचन — कभी भी — ever
सर्वत्र — सभी जगह — everywhere
किम् — क्या — what


वयम् अभ्यासं कुर्मः

१. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरत।

क. विद्या किं ददाति?
उत्तर: विनयम्।

ख. कस्मात् पात्रतां याति?
उत्तर:
विनयात्।

ग. राजा कुत्र पूज्यते?
उत्तर:
स्वदेशे।

घ. विद्वान् कुत्र पूज्यते?
उत्तर:
सर्वत्र।

ङ. कस्य कोशः अपूर्वः अस्ति?
उत्तर:
भारत्याः।


२. रिक्तस्थानानि पूरयत् — Fill in the blanks

यथा — विद्याधनम् सर्वधनप्रधानम्।

क. न भ्रातृभाज्यं न च __________।
उत्तर:
भारकारि।

ख. विनयाद् __________।
उत्तर:
याति पात्रताम्।

ग. अपूर्वः कोऽपि __________ विद्यते तव भारति।
उत्तर:
कोशः।

घ. व्ययतो वृद्धिमायाति __________।
उत्तर:
सञ्चयात्।

ङ. विद्वत्त्वं च __________ च नैव तुल्ये कदाचन।
उत्तर:
नृपत्वम्।
 
३. अधोलिखितानि वाक्यानि बहुवचने परिवर्तयत्-

यथा: आयाति → आयान्ति

क. विद्यते → विद्यन्ते
ख. याति → यान्ति
ग. वर्धते → वर्धन्ते
घ. पूज्यते → पूज्यन्ते
ङ. उपयते → उपयन्ते


क्रियाकलापः — Activity
भागः - अ

1. शिक्षकः पाठे आगतान् श्लोकान् लयेन गायन्तु, तेष्यः प्रश्नान् च पृच्छन्तु।

 
2. छात्राः प्रदत्तान् “विद्या-महिमा” इति पाठस्य श्लोकान् सस्वरं (लय-ताल-सहितम्) शुद्धम् उच्चारणं करिष्यन्ति।

 
3. “विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्” इति विषये स्वविचारान् स्वभाषायाम् अथवा सरलसंस्कृते २–३ वाक्येषु वदन्तु।

 
4. शिक्षकः श्लोकेषु आगतानां शब्दार्थानाम् उपरि कक्षायां छात्रैः सह प्रतियोगितां कारयेत्।

5. शिक्षकः श्लोकस्य अर्थं एकं वदिष्यति, छात्राः च अभिन्नं पङ्क्तिं मौखिकरूपेण पूरयिष्यन्ति।

भागः - ब
 
१. मञ्जूषायाः उचितं पदं चित्वा श्लोकं पूरयत्

मञ्जूषा: (विद्याधनम् — सर्वधनप्रधानम् — भारकारि, वृद्धिम् — क्षयम्,  स्वदेशे — सर्वत्र)
 
क. विद्याधनं __________ अस्ति।
उत्तर:
सर्वधनप्रधानम्
 
ख. विद्या सञ्चयात् __________ याति।
उत्तर:
क्षयम्

ग. विद्वान् __________ पूज्यते।
उत्तर:
सर्वत्र
 
२. विशेषण-विशेष्यमेलनम्-

निर्देश: ‘क’ खण्डे दत्तानां विशेषणशब्दानां ‘ख’ खण्डे दत्तैः उचितैः विशेष्यशब्दैः सह मेलनं कुरुत।

खण्ड ‘क’ — विशेषण   ‘ख’ — विशेष्य

अपूर्वः                                 कोशः

सर्वधनप्रधानम्                     धनम्

गुप्तम्                                 विद्या

सही मिलान:

अपूर्वः — कोशः
सर्वधनप्रधानम् — धनम्
गुप्तम् — विद्या
 
३. सत्यम् / आम् (असत्यम् / न)

निर्देश: दत्तानि कथनानि पठित्वा सम्यक् कोष्ठके ‘आम्’ अथवा ‘न’ लिखन्तु।
 
क. विद्यापि धनं भ्रातृभाज्यम् अस्ति।
उत्तर:


ख. विद्याधनं व्यये कृते न्यूनं भवति।
उत्तर:


ग. राजा केवलं स्वदेशे एव पूज्यते।
उत्तर:
आम्

 
Quick Chapter Summary

Sanskrit: विद्या मनुष्यस्य जीवनस्य सर्वाधिकं महत्त्वपूर्णं धनम् अस्ति। विद्या विनयं ददाति, विनयात् पात्रता, पात्रत्वात् धनम्, धनात् धर्मः, धर्मात् सुखं च प्राप्यते। विद्या दानेन वर्धते। विद्वान् सर्वत्र पूज्यते। अतः सर्वैः विद्यायाः महत्त्वं ज्ञात्वा तस्याः अर्जनं तथा वितरणं करणीयम्।

Hindi: विद्या मनुष्य के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण धन है। विद्या से विनय, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है। विद्या बाँटने से बढ़ती है। विद्वान व्यक्ति हर जगह सम्मानित होता है। इसलिए हमें विद्या प्राप्त करने और उसे दूसरों तक पहुँचाने का प्रयास करना चाहिए।

English: Knowledge is the most valuable wealth in human life. It gives humility; humility leads to worthiness, worthiness to wealth, wealth to righteous conduct, and righteous conduct to happiness. Knowledge grows when it is shared. A learned person is respected everywhere. Therefore, everyone should acquire knowledge and share it with others.

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