Class 9 Sanskrit Iravati Chapter 8 बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता | NCERT Translation, Question Answrs & Solutions

Class 9 Sanskrit Iravati Chapter 8 बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता | NCERT Translation, Question Answrs & Solutions

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पाठ: 8 -बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता (Bilasya Vani Na Kadapi Me Shruta)

प्रस्तुत पाठ संस्कृत के प्रसिद्ध नीति कथाग्रन्थ पञ्चतन्त्रम के तृतीया तन्त्र "काकोलूकीयम'' से लिया गया है। पञ्चतन्त्र के रचयिता विष्णुशर्मा हैं। इस ग्रन्थ में पशु-पक्षियों के माध्यम से जीवनोपयोगी शिक्षाएँ दी गई हैं। इस कथा में एक सिंह और एक चतुर शृगाल की कहानी है। शृगाल अपनी बुद्धिमत्ता, प्रत्युत्पन्नमतित्व और समयानुकूल निर्माण लेकर आए हुए सङ्कट से स्वयं की रक्षा कर लेता है। यह पाठ हमें सिखाता है कि कठित परिस्थिति में धैर्य और चातुर्य से कार्य करना चाहिए। 

The given lesson has been taken form Panchatantra, the famous Sanskrit collection of moral stories, specifically form its third section, Kakolukiyam. The author of Panchatantra is Vishnu Sharma. Through stories involving animals and birds, this work imparts values lessons for life. This particular story tells of a lion and a clever jackal. By using his intelligence, presence of mind, and the ability to make decisions according to the situation, the jackal successfully protects himself from the danger that confronts him. The lesson teaches us that in difficult situations, one should act with patience, wisdom and cleverness. 

बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता

1। कस्मिंश्चित् वने खरनखरः नाम सिंहः प्रतिवसति स्म। सः कदाचित् इतस्ततः परिभ्रमन् क्षुधार्तः न किञ्चिदपि आहारं प्राप्तवान्। ततः सूर्यास्तसमये एकां महतीं गुहां दृष्ट्वा सः अचिन्तयत् -" नूनम् एतस्यां गुहायां रात्रौ कोSपि जीवः आगच्छति। अतः अत्रैव निगूढो भूत्वा तिष्ठामि" इति।

Hindi Translation: - 

किसी वन में खरनखर नामक शेर रहता था। किसी एक दिन इधर -उधर घूमते हुए भूख से पीड़ित उस ने कुछ भी भोजन प्राप्त नहीं किया। उसके बाद दिन छिपने के समय एक बड़ी गुफ़ा को देखकर उसने सोचा -" निश्चित रूप से इस गुफ़ा में रात में कोई प्राणी आता है। इसलिए यहीं छिपकर ठहरता हूँ।

English Translation: -

There lived a lion named Kharankhar in a forest. One day, wandering around, hungry, he found nothing to eat. Then, at dusk, he saw a large cave and thought, "Surely some creature comes into this cave at night. So I will hide here and stay."

2। एतस्मिन् अन्तरे गुहायाः स्वामी दधिपुच्छः नामक शृगालः समागच्छत्। स च यावत् पश्यति तावत् सिंहपदपद्धतिः गुहायां प्रविष्टा दृश्यते, न च बहिरागता। शृगालः अचिन्तयत -"अहो विनष्टोSस्मि। नूनम् अस्मिन् बिले सिंहः अस्तीति तर्कयामि। तत किं करवाणि?" एवं विचिन्त्य दूरस्थः रवं कर्तुमारब्धः -"भो बिल! भो बिल! किं न स्मरसि, यन्मया त्वया सह समयः कृतोSस्ति यत यदाहं बाह्यतः प्रत्यागमिष्यामि तदा त्वं माम् आकारयिष्यसि? यदि त्वं मां न आह्वयसि तर्हि अहं द्वितीयं बिलं यास्यामि इति। "

Hindi Translation :

इसी बीच गुफ़ा का स्वामी दधिपुच्छ नामक गीदड़ आ गया। और वह जहाँ तक देखता वहाँ तक उसे शेर के पैरों के निशान गुफ़ा में दिखें और बाहर आए नहीं दिखे। गीदड़ ने सोचा -"अरे मैं तो मर गया। निश्चय से इस बिल में सिंह है ऐसा मैं सोचता हूँ। तो क्या करूँ ? ऐसा सोचकर दूर खड़े होकर आवाज करना शुरू कर दिया -"अरे बिल! क्या याद नहीं है, जो मैंने तुम्हारे साथ समझौता किया है की जब मैं बाहर से वापस आऊँगा तब मुझे बुलाओगी ? यदि तुम मुझे नहीं बुलाती हो तो मैं दूसरे बिल में चला जाऊँगा।

English Translation: -

Meanwhile, the owner of the cave, a jackal named Dadhipuchh, arrived. As far as he could see, he saw lion footprints inside the cave, but he couldn't see any lion coming out. The jackal thought, "Oh, I'm dead. I'm sure there's a lion in this hole. So what should I do?" Thinking this, he stood at a distance and started calling out, "Hey, hole! Don't you remember the agreement I made with you that you'll call me when I come back from outside? If you don't call me, I'll go to another hole." 


3। अथ एतच्छुत्वा सिंहः अचिन्तयत् -" नूनमेषा गुहा स्वामिनः सदा समाह्वानं करोति। परन्तु मद्भायत् न किञ्चित् वदति।"

अथवा साध्विदम् उच्यते -

भयसन्त्रस्तमनसां हस्तपादादिकाः क्रियाः।

प्रवर्तन्ते न वाणी च वेपथुश्चाधिको भवेत्।।



Hindi Translation: -


इसके बाद यह सुनकर सोचा- "निश्चय से ही यह गुफा अपने मालिक का सदा आह्वान करती है। परन्तु मेरे डर से कुछ नहीं बोल रही है।

अथवा ठीक ही यह कहते है -

'भय से डरे हुए मन वाले लोगों के हाथ और पैर से होने वाली क्रियाएँ ठीक तरह से नहीं होती और वाणी भी ठीक काम नहीं करती; घबराहट भी अधिक होता है।

English Translation: -

After hearing this, I thought, "This cave is surely always calling out to its owner. But it's not saying anything because of my fear."

Or it's more accurate to say this:

"People with fearful minds don't have proper hand and foot movements, and their speech doesn't function properly; they're also more nervous."  


4। तदहम अस्य आह्वानं करोमि। एवं सः बिले प्रविश्य मे भोज्यं भविष्यति। इत्थं विचार्य सिंहः सहसा शृगालस्य आह्वानमकरोत्। सिंहस्य उच्चगर्जन प्रतिध्वनिना सा गुहा उच्चैः शृगालम् आह्वयत्। अनेन् अन्येSपि पशवः भयभीताः अभवन्। शृगालोSपि ततः दूरं पलायमानः इममपठत् -

अनागतं यः कुरुते स शोभते स शोच्यते यो न करोत्यनागतम्।

वनेSत्र संस्थस्य समागता जरा बिलस्य वाणी न कदापि मे श्रुता।।


Hindi Translation: -

तो मैं इसको पूरकता हूँ इस तरह वह बिल में प्रवेश करके मेरा भोजन बन जाएगा। इस प्रकार सोचकर शेर ने अचानक गीदड़ को पुकारा। शेर की गर्जना की गूँज से वह गुफ़ा ज़ोर से गीदड़ को पुकारने लगी। इससे दूसरे पशु भी डर से व्याकुल हो गए। गीदड़ भी वहाँ से दूर भागते हुए इस श्लोक को पढ़ने लगा -

जो आने वाले कल का उपाय करता है, वह संसार में शोभा पाता है और जो आने वाले कल का उपाय नहीं करता है वह दुखी होता है। यहाँ वन में रहते मेरा बुढ़ापा आ गया मेरे द्वारा कभी भी बिल की वाणी नहीं सुनी गई।

English Translation: -

So I will complement it, and in this way it will enter the burrow and become my food. Thinking thus, the lion suddenly called out to the jackal. The echo of the lion's roar filled the cave, calling out to the jackal loudly. This frightened the other animals. The jackal also ran away from there and started reciting this verse -

He who makes arrangements for tomorrow is respected in the world, and he who does not make arrangements for tomorrow is unhappy. Living here in the forest, I have grown old and have never heard  the voice of the burrow.

अत्र इदम् अवधेयम् 

१. भयसन्त्रस्तमनसां ................................... वेपथुश्चाधिको भवेत्।।
 
पदच्छेद : भयसन्त्रस्तमनसां हस्तपादादिकाः क्रियाः प्रवर्तन्ते न वाणी च वेपथुः  भवेत्। 

भावार्थः - यदा जनाः अत्यधिकं विभेति तदा भयात् हस्तपादयोः बहु कम्पनं भवति वाणी अपि अस्पष्टा 

२. अनागतं यः कुरुते ..................................न कदापि मे श्रुता।।

पदच्छेद : अनागतम् यः कुरुते सः शोभते। सः शोच्यते। यः न करोति अनागतम् वने अत्र संस्थस्य समागतं।  जरा बिलस्य वाणी न कदा अपि मे श्रुता। 

भावार्थ ः यः अनगतां विपत्तिं बुद्धौ विचार्य कार्यं करोति, स सुरक्षितः तिष्ठति। किन्तु भविष्यकालीन विपत्तिम् अविचिन्त्य कार्यं करोति सः चिन्तामग्नाः भवति। आजन्म वने स्थित्वा मम वृद्धावस्ता आगता परम् अहं कदापि वाणीं न श्रुतवान् अस्मि। 

३. अव्यय प्रयोगः 
यथा - १. बालकः पाठं पठितवान् 
बालकेन पाठः पठितः 

२. बालिका पाठः पठितवती 
बालिकया पाठः पठितः। 


कर्तृवाच्चे धातोः परं क्तवतु प्रत्ययस्य प्रयोगः भवति किन्तु कर्मवाचे क्त प्रत्ययस्य प्रयोगः भवति 

कर्तृवाच्ये - बालकः पाठं पठितवान् 
कर्मवाच्ये -बालकेन पाठः पठितः।  

कर्मवाच्ये धातोः परं क्तवतु प्रत्ययस्य प्रयोगः भवति किन्तु कर्मवाच्ये 'क्त' प्रत्ययस्य प्रयोगः भवति -

कर्तृवाच्ये - बालकः पाठं पठितवान 
कर्मवाच्ये - बालकेन पाठः पठितः 
कर्तृवाच्ये - बालिका कवितां श्रुतवती 
कर्मवाच्ये - बालिकया कविता श्रुता 
कतृवाच्ये - वानरः फलं खादितवान 
कर्मवाच्ये - वानरेण फलं खादितम 
पदस्वरे - पठितः पठितौ पठिता 
                लिखितः लिखितौ लिखिताः इत्यादयः 
 

वयं अभ्यासं कुर्मः 

१. उदाहरण अनुसृत्य एकपदेन उत्तरं लिखत -


यथा- प्रश्नः खरनखरः कुत्र वसति /
उत्तरम -वने 

(क) सिंहस्य नाम किम?
(ख) गुहायाः स्वामी कः आसीत?
(ग) सिंहः कडा गुहायाः समीपे आगतः?
(घ) हस्तपादादिकाः क्रिया केषां न प्रवर्तन्ते?
(ङ) गुहा केन प्रतिध्वनिता?

उत्तरम्-

(क) खरनखरः 
(ख) दधिपुच्छः 
(ग) सूर्यास्तसमये 
(घ) भयसन्त्रस्तमनसाम 
(ङ) सिंहगर्जनेन 
 
 
२. उदाहणमनुसृत्य पट्टिकातः अव्ययपदानि चित्वा वाक्यानि पूरयत -

(सदा, बहिः, दूरम, तावत, तर्हि, तदा )

यथा -यदि वर्षा भवति, तर्हि वयं गृहे तिष्ठामः। 
(क) यदा सूर्य उदेति, .....................सर्वत्र प्रकाशः भवति।
(ख) सूर्यः। ...............................पूर्वदिशि एव उदेति। 
(ग) शृगालः गुहायाः। ................................ आसीत। 
(घ) सः यावत पश्यति, ..............................सिंहपदपद्धतिः दृश्यते। 
(ङ) शृगालः ततः। .....................पलायमानः अभवत। 
(च) यदि सफलताम इच्छसि, .........................आलस्यं त्यजः। 

उत्तरम्-

(क) यदा सूर्य उदेति, तदा सर्वत्र प्रकाशः भवति।
(ख) सूर्यः सदा पूर्वदिशि एव उदेति। 
(ग) शृगालः गुहायाः बहिः आसीत। 
(घ) सः यावत पश्यति, तावत सिंहपदपद्धतिः दृश्यते। 
(ङ) शृगालः ततः दूरम पलायमानः अभवत। 
(च) यदि सफलताम इच्छसि, तर्हि आलस्यं त्यजः। 


३. रेखांकितपदानि आधृत्य यथोदाहरणं प्रश्नवाक्यनिर्माणं कुरुत-

यथा -प्रश्नः सिंहः सूर्यास्तसमये गुहाम् अपश्यत्। 
उत्तरम्- सिंहः कदा गुहाम् अपश्यत् ?

(क) खरनखरः वने प्रतिवसति स्म। 
(ख) महतीं गुहां दृष्ट्वा सिंहः अचिंतयत्। 
(ग) शृगालः दूरं पलायितः। 
(घ) शृगालः भयेन अचिंतयत्। 
(ङ) विचार्य सिंहः शृगालस्य आह्वानमकरोत्। 


  उत्तरम्- 

(क) खरनखरः कुत्र प्रतिवसति स्म?
(ख) महतीं गुहां दृष्ट्वा कः अचिंतयत्?
(ग) शृगालः कुत्र पलायितः?
(घ) शृगालः केन अचिंतयत्?
(ङ) विचार्य सिंहः कस्य आह्वानमकरोत्?

क्रियाकलापः 
१. वयं चर्चयामः (मौखिकम्) 

(क) 'संकटसमये धैर्यस्य महत्त्वम् भवति' इति भावं कथायाः अनुसारं चर्चयत्। 
(ख) 'बुद्धिः बलात् श्रेष्ठा भवति' इति शृगालस्य बुद्धिमत्ताम् आधारीकृत्य परस्परं चर्चां कुरुत। 
(ग) भवतः जीवनस्य कमपि अनुभवं चर्चयत् यदा प्रत्युत्पन्नमतित्वेन भवान् संकटात मुक्तः अभवत्। 
  

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