पञ्चमः पाठः : एषा सा कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी
Class 9 Sanskrit Sharada Chapter 5 Translation
पाठः तथा अनुवादः (Paragraph-wise Sanskrit, Hindi & English)
पाठ-प्रवेशः (Introduction)
आधुनिके विज्ञानयुगे यदा मानवजीवनं द्रुतगत्या परिवर्तनशीलम् अस्ति, तदा अत्र कृतकबुद्धिः प्रभावशालि-साधनरूपेण समुपस्थिता वर्तते। अत्र यन्त्राणि मानववत् चिन्तयन्ति, निर्णयं च कुर्वन्ति। अहो ! अवलोकनीयं कृतकबुद्धेः सामर्थ्यं तत्र।
अस्मिन् पाठे "कृतकबुद्धिः मानवबुद्धेः सहकरी" इति कश्चित् वार्तालापः प्रस्तुत अस्ति। यत्र अध्यापकः छात्राः च मिलित्वा कृतकबुद्धेः स्वरूपम्, उपयोगक्षेत्राणि, लाभान् सीमां च अधिकृत्य चर्चा कुर्वन्ति।
एषः पाठः न केवलं कृतकबुद्धेः विषये सूचनां प्रयच्छति अपि तु विद्यार्थिनां चिन्तन-शक्तिं विवेकं च जागरयति। एषा कृतकबुद्धिः कथं मानवहिताय उपयोगिनी भवेत् इति चिन्तनीयः विषयः।
हिन्दी अनुवाद :
आधुनिक विज्ञान के युग में जब मानव-जीवन तीव्र गति से बदल रहा है, तब यहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) एक प्रभावशाली साधन के रूप में उपस्थित हुई है। यहाँ मशीनें मनुष्यों की तरह सोचती हैं और निर्णय लेती हैं। अरे ! वहाँ कृत्रिम बुद्धि का सामर्थ्य वास्तव में देखने योग्य है।
इस पाठ में "कृत्रिम बुद्धि मानव बुद्धि की सहयोगी है"—इस विषय पर एक संवाद प्रस्तुत किया गया है। जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर कृत्रिम बुद्धि के स्वरूप, उसके उपयोग के क्षेत्रों, लाभों और सीमाओं पर चर्चा करते हैं।
यह पाठ न केवल कृत्रिम बुद्धि के विषय में जानकारी प्रदान करता है, बल्कि विद्यार्थियों की चिंतन-शक्ति और विवेक को भी जाग्रत करता है। यह कृत्रिम बुद्धि किस प्रकार मानव-कल्याण के लिए उपयोगी सिद्ध हो सकती है, यह विचारणीय विषय है।
English Translation :
In the modern era of science, when human life is rapidly changing, Artificial Intelligence (AI) has emerged as an impactful tool. Here, machines think and make decisions just like humans. Indeed, the capability of artificial intelligence is truly remarkable! I
n this chapter, a dialogue titled "Artificial Intelligence: A Companion to Human Intelligence" is presented. In it, the teacher and students collectively discuss the nature, areas of application, benefits, and limitations of AI.
This lesson not only imparts information regarding AI but also stimulates the students' critical thinking and discernment. How this artificial intelligence can be beneficial for human welfare is a matter of contemplation.
परिच्छेदः १ : वार्तालापः – भूमिका स्वरूपं च (Dialogue - Part 1)
(स्थानं – विद्यालयकक्षा। अध्यापकः कक्षायां प्रविशति ।)
सर्वे छात्राः : शुभप्रभातं, गुरुवर्य !
अध्यापकः : शुभप्रभातं, प्रियच्छात्राः !
यशिका : महोदय ! अद्य अहम् किञ्चन चालकरहितं पटु-कारयानं दृष्टवती। अहम् आश्चर्यचकिता। किम् एतत् संभवम् ?
अध्यापकः : अवश्यं यशिके ! एतत् कृतकबुद्ध्या सम्भवति।
कात्यायनी : महोदय ! केयं कृतकबुद्धिः, अद्य वयम् अस्याः विषये ज्ञातुमिच्छामः।
अध्यापकः : अद्यत्वे अयं बहुचर्चितः विषयः अस्ति। भवत्सु कृतकबुद्धेः विषये कोऽपि जानाति वा ?
श्रेया : आचार्य ! अहं जानामि। यदा यन्त्राणि मनुष्यवत् चिन्तयन्ति, निर्णयं कुर्वन्ति, कार्यं च कुर्वन्ति, तदा तत्र
कृतकबुद्धिः उपस्थिता अस्ति इति जानीमः।
अध्यापकः : सुष्ठु ! यया अचेतनयन्त्राणि मानवबुद्धिवत् कार्यं कुर्वन्ति, सा कृतकबुद्धिः इति वैज्ञानिकाः मन्यन्ते।
अथर्वः : आम्, चैट-जीपीटी इति नामकं संवादोपकरणमपि कृतकबुद्ध्या युक्तम् अस्ति।
अध्यापकः : साधु ! चैट-जीपीटी, सिरि, एलेक्सा, गूगल मानचित्रं, जेमिनि, मेटा-कृतकबुद्धिः, परप्लेक्सिटि चेत्यादयः अनुप्रयुक्ततन्त्रविशेषाः कृतकबुद्धियुक्ताः सन्ति।
यशिका : अहं चैट-जीपीटी इत्यनेन अनेकेषां प्रश्नानां यथेष्टम् उत्तराणि प्राप्तवती। इदं कृतकबुद्ध्याः कारणात् एव संभवम्।
अथर्वः : मम माता 'एलेक्सा' नामकस्य यन्त्रस्य उपयोगं करोति। एतत् गीतं गायति, विद्युद्दीपं ज्वालयति, दैनिकसंवादं वातावरणस्थितिं च सूचयति।
पावनी : अहो ! मम माता गूगल-सहायकेन सह वार्ता करोति।
हिन्दी अनुवाद :
(स्थान – विद्यालय की कक्षा। शिक्षक कक्षा में प्रवेश करते हैं।)
सभी छात्र : सुप्रभात, आदरणीय गुरु जी !
शिक्षक : सुप्रभात, प्रिय विद्यार्थियों !
यशिका : महोदय ! आज मैंने एक चालक-रहित (बिना ड्राइवर वाली) स्मार्ट कार देखी। मैं हैरान रह गई। क्या यह
संभव है ?
शिक्षक : बिल्कुल यशिका ! यह कृत्रिम बुद्धि (AI) के कारण ही संभव है।
कात्यायनी : महोदय ! यह कृत्रिम बुद्धि क्या है, आज हम इसके बारे में जानना चाहते हैं।
शिक्षक : आजकल यह बहुत चर्चित विषय है। क्या आपमें से कोई कृत्रिम बुद्धि के बारे में जानता है ?
श्रेया : आचार्य जी ! मैं जानती हूँ। जब मशीनें मनुष्य की तरह सोचने लगती हैं, निर्णय लेती हैं और कार्य करती हैं, तब
हम जानते हैं कि वहाँ कृत्रिम बुद्धि उपस्थित है।
शिक्षक : बहुत अच्छे ! जिसके द्वारा जड़ मशीनें मानव-बुद्धि की तरह कार्य करती हैं, वैज्ञानिक उसे ही कृत्रिम बुद्धि
मानते हैं।
अथर्व : हाँ, 'चैट-जीपीटी' नामक संवादात्मक टूल भी कृत्रिम बुद्धि से युक्त है।
शिक्षक : शाबाश ! चैट-जीपीटी, सिरी, एलेक्सा, गूगल मैप्स, जेमिनी, मेटा ए.आई., परप्लेक्सिटी आदि सभी विशिष्ट
सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन कृत्रिम बुद्धि से युक्त हैं।
यशिका : मैंने चैट-जीपीटी से अपने अनेक प्रश्नों के मनचाहे उत्तर प्राप्त किए हैं। यह कृत्रिम बुद्धि के कारण ही संभव हो सका है।
अथर्व : मेरी माँ 'एलेक्सा' नामक उपकरण का उपयोग करती हैं। यह गाना बजाती है, लाइट जलाती है, दैनिक बातचीत करती है और मौसम का हाल बताती है।
पावनी : अरे ! मेरी माता जी गूगल असिस्टेंट के साथ बातचीत करती हैं।
English Translation :
(Setting – School classroom. The teacher enters the classroom.)
All Students : Good morning, respected Teacher!
Teacher : Good morning, dear students!
Yashika : Sir! Today I saw a driverless smart car. I was astonished. Is this really possible?
Teacher : Certainly, Yashika! This is possible through Artificial Intelligence.
Katyayani : Sir! What is this Artificial Intelligence? Today we wish to learn about it.
Teacher : Nowadays this is a widely discussed topic. Does anyone among you know about Artificial Intelligence?
Shreya : Teacher! I know. When machines think, make decisions, and perform tasks like humans, we know that Artificial Intelligence is present there.
Teacher : Very good! Scientists consider Artificial Intelligence to be that capability by which inanimate machines function like the human intellect.
Atharva : Yes, the conversational tool named ChatGPT is also powered by Artificial Intelligence.
Teacher : Well said! Applications such as ChatGPT, Siri, Alexa, Google Maps, Gemini, Meta AI, and Perplexity are all endowed with Artificial Intelligence.
Yashika : I obtained satisfactory answers to many questions using ChatGPT. This was possible only because of Artificial Intelligence.
Atharva : My mother uses a device named 'Alexa'. It plays songs, turns on lights, holds daily conversations, and informs about the weather.
Paavani : Wow! My mother talks with Google Assistant.
परिच्छेदः २ : प्रकाराः कार्यविधिः च (Dialogue - Part 2)
अध्यापकः : साधु ! एषा काचित् 'बुद्धिमती' यन्त्रप्रणाली अस्ति। किं यूयं जानीथ कृतकबुद्धेः कतिपयाः प्रमुखाः प्रकाराः
सन्ति ?
अक्षतः : के ते प्रकाराः मान्यवर !
अध्यापकः : ते सन्ति —
• सङ्कुचितकृतकबुद्धिः – जीपीटी, गूगल-मानचित्रं, यू-ट्यूब्।
• सामान्यकृतकबुद्धिः – मानवसमाना बुद्धिमत्ता (एतत् लक्ष्यं भवति)।
• अत्युत्कृष्टकृतकबुद्धिः – मानवात् अपि अधिका बुद्धिमती – एषा काल्पनि ।
वेदः : किन्तु आचार्य ! अस्माकं बुद्धिस्तु ईश्वरेण मस्तिष्के स्थापिता अस्ति, कथम् एषा बुद्धिः यन्त्रे स्थाप्यते ?
अध्यापकः : उत्तमः प्रश्नः। प्रौद्योगिकीविशारदाः यन्त्राधिगमः, गहनाधिगमः चेति विधिना एतानि यन्त्राणि प्रशिक्षयन्ति, अनुप्रयोगाय च सज्जीकुर्वन्ति।
आर्यः : यन्त्राणामपि पाठशाला अस्ति वा ? (सर्वे हसन्ति)
अध्यापकः : अस्याः यन्त्रपाठशालायाः नाम "डेटासेट्” इति ! कृतकबुद्धिः यन्त्रं दत्तांशमाध्यमेन शिक्षणं करोति।
यशिका : किन्तु आचार्य ! यदि अशुद्धदत्तांशः दीयते तर्हि कृतकबुद्धिः अपि त्रुटिं करोति ?
अध्यापकः : आम्। यदा प्रशिक्षणदत्तांशः पक्षपातयुक्तः भवति, तदा निष्कर्षाः अपि पक्षपातयुक्ताः भवन्ति। एषः दोषः
'पूर्वग्रहः' इति कथ्यते। कृतकबुद्धिः अद्यापि विकासपदे अस्ति। सेदानीं मानवीयपरिचर्या-विवेकेन सह त्रुटिरहितरूपेण ग्रहीतुं शक्यते।
हिन्दी अनुवाद :
शिक्षक : उत्तम ! यह एक प्रकार का 'बुद्धिमान' मशीन सिस्टम है। क्या आप जानते हैं कि कृत्रिम बुद्धि के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं ?
अक्षत : वे कौन-से प्रकार हैं, महोदय ?
शिक्षक : वे हैं —
• संकुचित कृत्रिम बुद्धि (Narrow AI) – जीपीटी, गूगल मैप्स, यूट्यूब।
• सामान्य कृत्रिम बुद्धि (General AI) – मनुष्य के समान बुद्धिमत्ता (यह भावी लक्ष्य है)।
• अत्युत्कृष्ट कृत्रिम बुद्धि (Super AI) – मानव से भी अधिक बुद्धिमान – यह अभी काल्पनिक है।
वेद : किन्तु गुरु जी ! हमारी बुद्धि तो ईश्वर ने हमारे मस्तिष्क में स्थापित की है, फिर यह बुद्धि मशीन में कैसे डाली जाती है ?
शिक्षक : बहुत सुंदर प्रश्न ! तकनीकी विशेषज्ञ 'मशीन लर्निंग' (यन्त्राधिगम) और 'डीप लर्निंग' (गहनाधिगम) की विधियों से इन मशीनों को प्रशिक्षित करते हैं और उपयोग के लिए तैयार करते हैं।
आर्य : क्या मशीनों की भी कोई पाठशाला होती है ? (सभी हँसते हैं)
शिक्षक : इस मशीनी पाठशाला का नाम "डेटासेट" (दत्तांश-समूह) है ! कृत्रिम बुद्धि मशीन को डेटा (आँकड़ों) के माध्यम से सिखाती है।
यशिका : किन्तु आचार्य ! यदि अशुद्ध डेटा दिया जाए तो क्या कृत्रिम बुद्धि भी गलती करती है ?
शिक्षक : हाँ। जब प्रशिक्षण का डेटा ही पक्षपातपूर्ण होता है, तब निष्कर्ष भी पक्षपातपूर्ण निकलते हैं। इस दोष को
'पूर्वाग्रह' (Bias) कहा जाता है। कृत्रिम बुद्धि अभी भी विकास की प्रक्रिया में है। इसे मानवीय निगरानी और विवेक के साथ ही त्रुटिहीन रूप से अपनाया जा सकता है।
English Translation :
Teacher : Splendid! This is a certain 'intelligent' machine system. Do you know what the primary types of Artificial Intelligence are?
Akshat : What are those types, respected Sir?
Teacher : They are —
• Narrow AI (सङ्कुचितकृतकबुद्धिः) – GPT, Google Maps, YouTube.
• General AI (सामान्यकृतकबुद्धिः) – Intelligence comparable to humans (this is a target goal).
• Super AI (अत्युत्कृष्टकृतकबुद्धिः) – Superior to human intelligence – this is currently hypothetical.
Ved : But Teacher! Our intellect was placed in our brains by God; how is this intellect installed into a machine?
Teacher : Excellent question! Technology experts train these machines and prepare them for application through methods known as Machine Learning and Deep Learning.
Arya : Do machines also have a school? (Everyone laughs)
Teacher : The name of this machine school is "Dataset"! Artificial Intelligence trains machines through the medium of data.
Yashika : But Sir! If incorrect data is provided, does Artificial Intelligence also make errors?
Teacher : Yes. When the training data is biased, the outcomes are also biased. This error is known as 'Bias' (पूर्वाग्रहः). Artificial Intelligence is still in the developing phase. Presently, it can be utilized error-free only with human oversight and prudence.
परिच्छेदः ३ : अनुप्रयोगक्षेत्राणि शिक्षा च (Dialogue - Part 3)
श्रेया : गुरुवर ! एषा बुद्धिः केषु स्थलेषु उपयुज्यते ?
अध्यापकः : श्रेये ! तव प्रश्नः अतीव महत्त्वपूर्णः। शिक्षायां, चिकित्सायां, कृषि-क्षेत्रे, न्यायालये, सञ्चारे, वित्ते, कलासङ्गीतक्षेत्रे मनोरञ्जनादिषु क्षेत्रेषु च कृतकबुद्धिः भूरिशः उपयुज्यते।
अथर्वः : महोदय ! कृतकबुद्धिः कथं शिक्षायां साहाय्यं करोति ? किं शिक्षकस्य स्थाने कृतकबुद्धिः अस्मान् पाठयिष्यति ? एतत् कथं सम्भवति ?
अध्यापकः : दीक्षा, स्वयम्, सर्वेषां कृते कृतकबुद्धिः, पी.एम्.-ईविद्या, संशयनिराकरणार्थं चैट्बोट्, भाषानुवादोपकरणानि च यत्र प्रयुज्यन्ते। एतानि कृतकबुद्ध्याधारितानि उपकरणानि सन्ति। एतेषां साहाय्येन छात्राः शिक्षकाणाम् अनुपस्थितौ अपि स्वयम् अध्येतुं शक्नुवन्ति।
आकाशः : हा धिक् ! एतेषां कारणेन मानवशिक्षकः किं प्रयोजनरहितः भविष्यति ?
अध्यापकः : न न ! कृतकबुद्धिः गुरुमित्रम् अस्ति, गुरुविकल्पः नास्ति। शिक्षकाणां सान्निध्ये छात्रेषु व्यक्तित्वविकासः भवति। शिक्षकाः पुस्तकीयज्ञानेन सह छात्रेषु मानवीयमूल्यबोधम् अपि जनयन्ति। ते अनुशासनं, परोपकारं, करुणां, तथैव व्यवहारज्ञानं च शिक्षयन्ति। सदा स्मरणीयं यत् कृतकबुद्धिः उपकरणम् अस्ति, प्रेरणा तु मानवेभ्यः एव आगच्छति।
हिन्दी अनुवाद :
श्रेया : गुरु जी ! इस बुद्धि का उपयोग किन-किन स्थानों (क्षेत्रों) में किया जाता है ?
शिक्षक : श्रेया ! तुम्हारा प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, न्यायालय, संचार, वित्त, कला-संगीत और
मनोरंजन आदि क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धि का प्रचुरता से उपयोग किया जाता है।
अथर्व : महोदय ! कृत्रिम बुद्धि शिक्षा में किस प्रकार सहायता करती है ? क्या शिक्षक के स्थान पर कृत्रिम बुद्धि हमें पढ़ाएगी ? यह कैसे संभव है ?
शिक्षक : दीक्षा, स्वयं, 'ए.आई. फॉर ऑल' (सर्वेषां कृते कृतकबुद्धिः), पी.एम. ई-विद्या, संदेह दूर करने के लिए चैटबॉट और भाषा-अनुवाद के उपकरण जहाँ प्रयुक्त होते हैं। ये सभी कृत्रिम बुद्धि पर आधारित उपकरण हैं। इनकी सहायता से छात्र शिक्षकों की अनुपस्थिति में भी स्वयं अध्ययन कर सकते हैं।
आकाश : हाय ! क्या इनके कारण मानव शिक्षक व्यर्थ (प्रयोजनहीन) हो जाएँगे ?
शिक्षक : नहीं, बिल्कुल नहीं ! कृत्रिम बुद्धि गुरु की मित्र (सहायक) है, गुरु का विकल्प नहीं। शिक्षकों के सान्निध्य में ही छात्रों में व्यक्तित्व का विकास होता है। शिक्षक किताबी ज्ञान के साथ-साथ छात्रों में मानवीय मूल्यों की समझ भी पैदा करते हैं। वे अनुशासन, परोपकार, करुणा और व्यावहारिक ज्ञान की शिक्षा देते हैं। हमेशा याद रखना चाहिए कि कृत्रिम बुद्धि मात्र एक उपकरण (साधन) है, प्रेरणा तो मनुष्यों से ही प्राप्त होती है।
English Translation :
Shreya : Respected Teacher! In which fields is this intelligence utilized?
Teacher : Shreya! Your question is extremely important. Artificial Intelligence is extensively employed in education, medicine, agriculture, courts of law, communication, finance, art and music, and entertainment.
Atharva : Sir! How does AI help in education? Will AI teach us in place of the teacher? How is that possible?
Teacher : Platforms where DIKSHA, SWAYAM, 'AI for All', PM e-VIDYA, chatbots for doubt clearance, and language translation tools are used. These are AI-driven instruments. With their aid, students can study independently even in the absence of teachers.
Aakash : Alas! Will human teachers become obsolete because of these?
Teacher : No, not at all! AI is a teacher's ally, not a substitute for the teacher. Students develop their personality under the direct guidance of teachers. Along with textbook knowledge, teachers also inculcate human values in students. They teach discipline, benevolence, compassion, and practical life knowledge. It must always be remembered that AI is merely a tool; true inspiration stems only from human beings.
परिच्छेदः ४ : अन्यक्षेत्राणि, श्लोकः भयं च (Dialogue - Part 4)
वेदः : अहम् कस्मिंश्चित् चलच्चित्रे दृष्टवान् यत् यन्त्राणि मानवेभ्यः संसारम् अधिगृह्णन्ति इति।
यशिका : अपि च, आचार्य ! किं कृतकबुद्धिः मानवस्य स्थानं हर्तुं शक्नोति ?
अध्यापकः : एषा चिन्ता समाजे प्रगाढं जायमाना अस्ति, किन्तु अत्र बोद्धव्यं यत् कृतकबुद्धिः सहायिका अस्ति, मनुष्यस्य प्रतिस्पर्धिनी न।
आर्यः : महोदय ! किं कृतकबुद्धिः चिकित्सायाम् अपि प्रयुज्यते ?
अध्यापकः : आम् ! रोबोटिक्-सर्जरी, रोग-पूर्वज्ञानं, कृतकबुद्धिः रश्मिपरीक्षणविद्या, चैट-कृतकबुद्धिः, औषधशुश्रूषा चेत्यादीनि तदाधारितानि चिकित्सोपकरणानि सन्ति।
अक्षतः : किं कृषि-क्षेत्रे अपि प्रयुज्यते ?
अध्यापकः : नूनं ! कृषि-क्षेत्रे अपि ड्रोनमाध्यमेन बीज-वपनं, कीटनिरीक्षणं, भूमिक्षमता-चेत्यादीनां परीक्षणम् अपि यन्त्रैः भवन्ति।
अथर्वः : गुरुदेव ! अपराधशमनाय कृतकबुद्धिः कथं साहाय्यं करोति ?
अध्यापकः : मुखपरिचयप्रणाली, पूर्वानुमेय-नियन्त्रणं चेत्यादि-योजनासु कृतकबुद्धेः प्रयोगः अस्ति।
यशिका : किं कृतकबुद्धिः काव्यमपि रचयितुं समर्था ?
अध्यापकः : अत्र भवन्तः किं चिन्तयन्ति ?
वेदः : अहं चैट-जीपीटी इत्यस्मात् एनं श्लोकं प्राप्तवान् —
विद्युत्प्रज्ञया यन्त्राणि नित्यं वदन्ति चेतनाः ।
अहोरात्रं न विश्रान्ताः मानवान् धारयन्ति ते ॥
(सर्वे सोत्साहं पठन्ति, आश्चर्यं च कुर्वन्ति)
पावनी : किन्तु श्रीमन्, कृतकबुद्धि-सकाशात् समाजे महत् भयम् अपि अस्ति।
अध्यापकः : सत्यं, भयस्य कारणमपि यथार्थम् अस्ति। अद्यत्वे कृतकबुद्धेः दुरुपयोगेन हि विभिन्नप्रकारकाः साइबर्-
अपराधाः समाजेषु देशेषु च चलन्ति। किं भवन्तः 'डीप्-फेक्' इति समस्याविषये जानन्ति ?
आकाशः : गुरुवर ! तत् डीप्-फेक् इति किमस्ति ?
अध्यापकः : डीप्-फेक् कृतकबुद्ध्या निर्मितं मिथ्याचित्रं, दृश्यं, ध्वनिः वा अस्ति। मिथ्यादृश्ये यत्र मुखं वाणी च मिथ्या
प्रस्तूयते - उपहासाय, अनेकदा अपराधाय चापि।
हिन्दी अनुवाद :
वेद : मैंने एक सिनेमा (फिल्म) में देखा था कि मशीनें मनुष्यों से दुनिया छीन लेती हैं (अधिग्रहण कर लेती हैं)।
यशिका : और गुरु जी ! क्या कृत्रिम बुद्धि मनुष्य का स्थान छीन सकती है ?
शिक्षक : समाज में यह चिंता गहरी होती जा रही है, लेकिन यहाँ यह समझना चाहिए कि कृत्रिम बुद्धि सहायक है,
मनुष्य की प्रतिद्वंद्वी (प्रतिस्पर्धी) नहीं।
आर्य : महोदय ! क्या कृत्रिम बुद्धि चिकित्सा में भी प्रयुक्त होती है ?
शिक्षक : हाँ ! रोबोटिक सर्जरी, बीमारी का पूर्व-अनुमान लगाना, ए.आई. रेडियोलॉजी (एक्स-रे आदि की जाँच), चैट-ए.आई., दवाइयों की देखरेख आदि इससे जुड़े चिकित्सा उपकरण हैं।
अक्षत : क्या कृषि के क्षेत्र में भी इसका उपयोग होता है ?
शिक्षक : अवश्य ही ! कृषि-क्षेत्र में भी ड्रोन के माध्यम से बीज बोना, कीड़ों की निगरानी करना, मिट्टी की उर्वरता की जाँच आदि कार्य मशीनों द्वारा होते हैं।
अथर्व : गुरुदेव ! अपराधों की रोकथाम के लिए कृत्रिम बुद्धि कैसे सहायता करती है ?
शिक्षक : फेशियल रिकॉग्निशन (मुख-पहचान प्रणाली) और प्रेडिक्टिव पुलिसिंग (अपराध के पूर्वानुमेय नियंत्रण) आदि योजनाओं में कृत्रिम बुद्धि का प्रयोग होता है।
यशिका : क्या कृत्रिम बुद्धि कविता रचने में भी सक्षम है ?
शिक्षक : इस विषय में आप लोग क्या सोचते हैं ?
वेद : मुझे चैट-जीपीटी से यह श्लोक प्राप्त हुआ —
‘बिजली की प्रज्ञा (कंप्यूटर-बुद्धि) से मशीनें सदैव चेतन जीवों की तरह बोलती हैं। दिन-रात बिना थके वे मानवों को संभालती/सहारा देती हैं।’
(सभी उत्साहपूर्वक पढ़ते हैं और आश्चर्यचकित होते हैं)
पावनी : किन्तु महोदय, कृत्रिम बुद्धि से समाज में बहुत बड़ा भय (डर) भी है।
शिक्षक : सच है, भय का कारण भी वास्तविक है। आजकल कृत्रिम बुद्धि के दुरुपयोग से विभिन्न प्रकार के साइबर
अपराध समाजों और देशों में चल रहे हैं। क्या आप 'डीपफेक' (Deepfake) समस्या के बारे में जानते हैं ?
आकाश : गुरु जी ! वह डीपफेक क्या होता है ?
शिक्षक : डीपफेक कृत्रिम बुद्धि द्वारा निर्मित झूठी तस्वीर (फोटो), वीडियो अथवा आवाज है। इस झूठे वीडियो में चेहरा और आवाज़ को झूठे ढंग से प्रस्तुत किया जाता है—मज़ाक उड़ाने के लिए अथवा कई बार अपराध करने के लिए भी।
English Translation :
Ved : I watched in a movie that machines take over the world from humans.
Yashika : Furthermore, Teacher! Can AI usurp the place of humans?
Teacher : This concern is deepening in society, but one must understand here that AI is a helper, not a rival to humankind.
Arya : Sir! Is AI utilized in medicine as well?
Teacher : Yes! Robotic surgery, disease prognosis, AI-based radiology, health chatbots, and
pharmaceutical care are medical tools based on it.
Akshat : Is it applied in agriculture too?
Teacher : Certainly! In the field of agriculture as well, seed sowing through drones, pest surveillance, soil capacity testing, etc., are performed by these machines.
Atharva : Master! How does AI assist in crime prevention?
Teacher : AI is employed in facial recognition systems and predictive policing initiatives.
Yashika : Is AI capable of composing poetry as well?
Teacher : What do you all think about this?
Ved : I obtained this verse from ChatGPT —
'Through electrical intelligence, machines constantly speak like conscious beings. Without resting day or night, they sustain human beings.'
(All read enthusiastically and express wonder)
Paavani : But Sir, there is also a great apprehension in society on account of Artificial Intelligence.
Teacher : True, the reason for apprehension is genuine as well. Nowadays, various types of cybercrimes are rampant across societies and nations due to the misuse of AI. Do you know about the issue called 'Deepfake'?
Aakash : Teacher! What is that Deepfake?
Teacher : Deepfake is a false image, video, or audio generated by artificial intelligence. In fabricated
videos, someone's face and voice are falsely portrayed—for mockery, and frequently for criminal intent.
परिच्छेदः ५ : समाधानं भविष्यं च (Dialogue - Part 5)
अथर्वः : अस्य निराकरणार्थम् उपायः कः ?
अध्यापकः : कृतकबुद्धि-साक्षरता, अस्माकं नैतिकतापूरितं प्रशिक्षणं, सर्वकारेण नियन्त्रणम्, आत्मनियन्त्रणं चेति विविधाः उपायाः अस्माभिः करणीयाः।
भास्करः : अहो ! "कृतकबुद्धिः मित्रं भवेत्, न भवेत् स्वामी" इति वाक्यं मम मनः स्पृशति।
वेदः : तथापि यदि कृतकबुद्धिः मनुष्यान् स्वस्ववृत्तेः निष्कासयति तर्हि कः तत्र रक्षणोपायः ?
अध्यापकः : तथाविधः सङ्कटः नापतेत् इति भारतसर्वकारेण स्किल्-इण्डिया, डिजिटल्-इण्डिया, ई-स्किल्-इण्डिया, चेत्याद्याः अनेकाः योजनाः सञ्चाल्यन्ते। एताभिः योजनाभिः प्रशिक्षिताः युवानः नवीनवृत्तीः प्राप्तुम् अर्हन्ति। वस्तुतः कृतकबुद्धिः स्वतः कस्यापि वृत्तिं न हरति। अपि तु कृतकबुद्धिप्रशिक्षितः जनः कदाचित् अप्रशिक्षितस्य जनस्य पारम्परिकवृत्तिं हरेत्।
यशिका : गुरुवर ! कृतकबुद्धि-द्वारा भविष्ये मानुषजीवनं कीदृशं भविष्यति ?
अध्यापकः : यदि विवेकपूर्वकं प्रयुज्यते, तर्हि जीवनम् अधिकं सुगमं, सुरक्षितं श्रेयस्करं च भविष्यति।
श्रेया : कृतकबुद्धिः एव मानवीयबुद्धिं कार्यक्षमतां च द्विगुणितां करिष्यति इति मम मतम्। भारतीय-कृतकबुद्धिप्रभाव-सम्मेलनम् - २०२६ (India AI Impact Summit - 2026) इत्यत्रापि उक्तमेतत्।
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